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चित्तरंजन में अपराध की नई पटकथा : कुख्यात राजेश राम का नया षड्यंत्र उजागर, वीडियो जारी कर खुद पर हमले का दावा….

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जामताड़ा (JAMTADA): सीमा क्षेत्र में बढ़ी हलचल — राजेश कुमार राम ने लगाया नया आरोप

झारखंड–बंगाल के बॉर्डर इलाके में लंबे समय से विवादों में घिरा नाम राजेश कुमार राम एक बार फिर चर्चा में है। इस बार उसने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर दावा किया है कि चित्तरंजन थाना क्षेत्र के फतेहपुर कम्युनिटी हॉल के पास उस पर जान लेने की कोशिश की गई। वीडियो में वह यह भी कहता है कि इस घटना के पीछे टीएमसी से जुड़े कुछ लोग हैं और पुलिस ने उसकी शिकायत पर गंभीरता नहीं दिखाई। उसने मामले की जानकारी पुलिस कमिश्नर को भेजी है।


वीडियो में लगाया गंभीर आरोप

राजेश राम ने अपने बयान में कहा कि 29 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे फतेहपुर कमेटी हॉल में उसके साथ मारपीट हुई। उसने कुछ लोगों — जिनमें श्यामल गोप, राहुल कुमार और राजेश यादव के नाम शामिल हैं — पर उसे चोट पहुँचाने का आरोप लगाया।
उसके अनुसार, घटना के बाद वह चित्तरंजन थाना गया, जहाँ से उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। अस्पताल से लौटने के बाद उसने लिखित आवेदन देना चाहा, परंतु पुलिस ने कथित रूप से उसकी शिकायत की कॉपी देने से इनकार कर दिया।


अपराध जगत में पुराना चेहरा

राजेश राम पहले भी कई मामलों में चर्चा में रह चुका है।
आसनसोल के मुथूट फाइनेंस दफ्तर से 12 किलो सोना और लाखों रुपये की डकैती के बाद उसका नाम बड़े स्तर पर सामने आया था। इसी मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस ने देवघर के जसीडीह में छापेमारी की थी, जहाँ चार संदिग्धों के साथ उसके नेटवर्क की पुष्टि हुई थी।

जांच में पाया गया कि वारदात के बाद आरोपी दल रातों-रात जसीडीह पहुँचे थे और होटल के दस्तावेज़ों, मोबाइल लोकेशन और आधार कार्ड की मदद से उनकी गतिविधियों पर सुराग मिले थे।


सोशल मीडिया और फर्जीवाड़े का आरोप

पिछली घटनाओं के बाद भी राजेश का अपराधी सफर रुका नहीं।
सूत्रों के मुताबिक, वह सोशल मीडिया पर खुद को बंगाल पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को ठगने का तरीका अपनाता था। जैसे ही सच सामने आता, वह अपने ऊपर हमले का ड्रामा कर पुलिस को भ्रमित करने की कोशिश करता।

यह भी आरोप है कि वह चित्तरंजन, सलानपुर, मिहिजाम, रानीगंज, दुर्गापुर और पास के अन्य क्षेत्रों में बार-बार पुलिस को गलत दिशा में मोड़कर फर्जी उगाही मामलों की कहानी गढ़ता रहा है।


मिहिजाम गोलीकांड में भी नाम जुड़ा

जानकारी के अनुसार, मिहिजाम में एक शादी समारोह के दौरान उसने कथित तौर पर हथियार से कई राउंड फायरिंग की थी। भीड़ ने उसे पकड़कर पिटाई की, जिसके बाद वह रूपनारायणपुर इलाके में पहुँच गया।
बताया जाता है कि वहाँ कुछ पुलिसकर्मियों की मदद से उसने मेडिकल रिपोर्ट को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और घटना को अलग मोड़ देने की कोशिश की।

इसी तरह, फतेहपुर की घटना को भी कुछ लोग उसकी नई रणनीति बताते हैं—पहले विवाद खड़ा करना, फिर खुद को पीड़ित दिखाकर मामला अपने पक्ष में मोड़ना।


पुलिस पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार, राजेश राम के कुछ पुलिसकर्मियों से संबंध होने के संकेत पहले भी मिल चुके हैं। उसकी फेसबुक प्रोफाइल पर बंगाल पुलिस की गाड़ियों और थानों की तस्वीरें खुले रूप में दिखाई देती हैं, जिससे संदेह पैदा होता है कि उसे कुछ अधिकारियों का संरक्षण मिला हुआ है।


सीमा क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चुनौती

वीडियो सामने आने के बाद झारखंड और बंगाल दोनों राज्यों की पुलिस के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
राजेश राम लंबे समय से सीमा पर कानून-व्यवस्था को प्रभावित करता रहा है और अब सोशल मीडिया के ज़रिये पुलिस की छवि पर भी सवाल उठा रहा है।

स्थानीय लोग कहते हैं कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में कोई बड़ी घटना हो सकती है। सीमा क्षेत्र में ऐसी आपराधिक गतिविधियाँ पुलिस पर आम जनता का भरोसा कम करती हैं, इसलिए दोनों राज्यों की संयुक्त कार्रवाई बेहद ज़रूरी है।

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