केंद्र सरकार जल्द नौ अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को दिखाएगी हरी झंडी

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DESK: केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि पश्चिम बंगाल और असम से शुरू होने वाली नौ नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को जल्द परिचालन में लाया जाएगा। इन नई ट्रेनों के जरिए आधुनिक लेकिन किफायती रेल सेवाओं का विस्तार होगा और देश के विभिन्न हिस्सों के बीच लंबी दूरी की यात्रा और अधिक सुगम बनेगी।

रेल मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि प्रस्तावित ट्रेनें असम, बिहार और पश्चिम बंगाल से गुजरने वाले प्रमुख रेल मार्गों पर चलेंगी। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां प्रवासी कामगारों और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या काफी अधिक रहती है। इन सेवाओं के शुरू होने से त्योहारों और भीड़ वाले समय में यात्रियों को सुविधाजनक, भरोसेमंद और सस्ते यात्रा विकल्प उपलब्ध होंगे।

नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे घनी आबादी वाले राज्यों को तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित देश के दूरस्थ हिस्सों से जोड़ेंगी। इससे रेल नेटवर्क पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद मिलेगी और राष्ट्रीय स्तर पर आवागमन को मजबूती मिलेगी।

प्रस्तावित अमृत भारत एक्सप्रेस मार्ग इस प्रकार हैं:

  • गुवाहाटी (कामाख्या) – रोहतक
  • डिब्रूगढ़ – लखनऊ (गोमती नगर)
  • न्यू जलपाईगुड़ी – नागरकोइल
  • न्यू जलपाईगुड़ी – तिरुचिरापल्ली
  • अलीपुरद्वार – एसएमवीटी बेंगलुरु
  • अलीपुरद्वार – मुंबई (पनवेल)
  • कोलकाता (संतरागाछी) – तांबरम
  • कोलकाता (हावड़ा) – आनंद विहार टर्मिनल
  • कोलकाता (सियालदह) – बनारस

रेल मंत्रालय के अनुसार, भारतीय रेलवे का फोकस आम यात्रियों के लिए सस्ती और लंबी दूरी की कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर है। इसी उद्देश्य से अमृत भारत एक्सप्रेस सेवाओं की शुरुआत की गई है, जिन्हें दैनिक यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

अमृत भारत एक्सप्रेस को ‘अमृत काल’ की एक अहम पहल के तौर पर देखा जा रहा है। ये नॉन-एसी लंबी दूरी की स्लीपर ट्रेनें हैं, जिनका किराया लगभग 1000 किलोमीटर पर 500 रुपये रखा गया है। किराया व्यवस्था सरल और पारदर्शी है तथा इसमें डायनामिक प्राइसिंग लागू नहीं की गई है, जिससे आम यात्रियों को सीधा लाभ मिलता है।

दिसंबर 2023 में पहली बार इन ट्रेनों के संचालन के बाद अब तक 30 अमृत भारत एक्सप्रेस सेवाएं शुरू की जा चुकी हैं। आगामी नौ नई ट्रेनों के जुड़ने से पूर्वी और उप-हिमालयी क्षेत्रों से लेकर दक्षिण, पश्चिम और मध्य भारत तक रेल संपर्क को नई मजबूती मिलेगी।

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