पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने दुनिया भर की चिंता को और गहरा कर दिया है। Iran और United States के बीच टकराव की स्थिति से न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस बीच Narendra Modi ने कूटनीतिक पहल करते हुए Qatar, Jordan, France, Oman और Malaysia के शीर्ष नेताओं से बातचीत की। उन्होंने क्षेत्र में शांति बहाल करने की अपील की और ऊर्जा ढांचे पर हो रहे हमलों की कड़ी आलोचना की।
ऊर्जा ढांचे पर हमले पर सख्त रुख
प्रधानमंत्री ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय के साथ चर्चा में साफ कहा कि भारत ऊर्जा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों को पूरी तरह अस्वीकार्य मानता है। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएं न सिर्फ क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाती हैं बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी नकारात्मक असर डालती हैं। भारत ने Strait of Hormuz के जरिए सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही की अहमियत को भी रेखांकित किया।
संवाद और कूटनीति पर जोर
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा हालात में संवाद और कूटनीति ही समाधान का रास्ता है। उन्होंने सभी देशों से मिलकर शांति बनाए रखने की अपील की। साथ ही संकट के समय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में ओमान की भूमिका की सराहना भी की।
तनाव घटाने के लिए त्वरित कदम जरूरी
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ चर्चा में भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता जताई गई। दोनों नेताओं ने माना कि हालात को नियंत्रण में लाने के लिए तत्काल कदम उठाना बेहद जरूरी है। क्षेत्र में तेल और गैस ठिकानों पर हमलों और जवाबी कार्रवाइयों से स्थिति और गंभीर होती जा रही है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
भारत की संतुलित पहल
पूरे घटनाक्रम में भारत ने संतुलित और जिम्मेदार रुख अपनाते हुए शांति और सहयोग पर जोर दिया है। जानकारों का मानना है कि भारत की यह कूटनीतिक पहल क्षेत्र में स्थिरता लाने और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।