धनबाद, 6 जनवरी 2025: लेखिका एवं कवयित्री मंजू शरण मंजुल की नई पुस्तक “कहीं-अनकही (शब्दों के सफ़र में)” हाल ही में यशिता प्रकाशन के तहत प्रकाशित हुई है। यह उनकी दूसरी कविता संग्रह है, जिसमें 56 अनमोल कविताएं शामिल हैं।
पेशे से शिक्षिका मंजुल की रचनाएं पाठकों को संवेदनशीलता और भावनाओं की गहराई में ले जाती हैं। उनकी कविताएं स्त्री जीवन, समाज, प्रेम, संघर्ष और अस्तित्व जैसे विषयों को गहनता से छूती हैं।
पुस्तक की कविताएं जैसे “स्त्री और नदी,” “राहगीर फिर पुराने रास्तों पर,” “मेरी कविता,” और “मुट्ठी में शहर” पाठकों को सोचने और महसूस करने पर मजबूर करती हैं। हर कविता के शब्द मानो दीप की तरह प्रकाशित होते हैं और अनकहे रिश्तों की डोर बांधने का प्रयास करते हैं।
मंजुल की कविताओं ने साहित्य जगत में एक अलग पहचान बनाई है। उनकी यह पुस्तक कविता प्रेमियों के लिए एक अनुपम उपहार है। “कहीं-अनकही” को लेकर पाठकों और साहित्यकारों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। लेखिका को उनकी इस उत्कृष्ट कृति के लिए अनंत बधाइयां और शुभकामनाएं।