धनबाद, 6 जनवरी 2025: प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री वीरेंद्र कुमार तिवारी के नेतृत्व में एक हाई-लेवल टीम ने सोमवार को मंडल कारा का दौरा किया। यह दौरा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर जेलों में जातिगत भेदभाव और बंदियों के बीच संभावित तनाव के आरोपों की जांच के लिए किया गया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने 31 अक्टूबर 2024 को पारित आदेश में जेलों में कैदियों के जातिगत वर्गीकरण की जांच के निर्देश दिए थे, जिसे सामाजिक संस्था सुकन्या बनाम भारत सरकार (रिट याचिका संख्या 1404/23) के मामले में उठाया गया था।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि मंडल कारा में जांच के दौरान ऐसी कोई अनियमितता नहीं पाई गई। जेल प्रशासन ने आश्वासन दिया कि बंदियों को जाति, धर्म या अन्य सामाजिक पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा, अपराध की प्रकृति और व्यवहार के अनुसार बैरकों में रखा जाता है।
जांच टीम में जिला प्रशासन, न्यायिक अधिकारियों, चिकित्सा और समाज कल्याण विभाग के साथ-साथ अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। जांच के दौरान मंडल कारा में प्रशासनिक प्रक्रिया और कैदियों की स्थिति संतोषजनक पाई गई।