DESK: बांग्लादेश में हिंदू कपड़ा श्रमिक दीपू चंद्र दास की निर्मम हत्या को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस घटना की अमेरिका सहित कई देशों ने कड़ी निंदा की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे धार्मिक हिंसा का गंभीर मामला बताते हुए चिंता जताई है, वहीं एक प्रमुख अमेरिकी सांसद ने इस हत्या को अमानवीय करार दिया है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे हमलों को लेकर कहा कि अमेरिका धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आज़ादी, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और संगठन के अधिकारों का समर्थन करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका किसी भी तरह की धार्मिक हिंसा के खिलाफ है। साथ ही, प्रवक्ता ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार द्वारा सभी समुदायों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे प्रयासों का स्वागत भी किया।
इस मामले पर अमेरिकी सांसदों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। प्रभावशाली सीनेटर रो खन्ना ने दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा की गई हत्या को बेहद भयावह बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि 27 वर्षीय हिंदू कपड़ा मजदूर की हत्या दिल दहला देने वाली है और इस दुखद घड़ी में उनकी संवेदनाएं पीड़ित परिवार और मित्रों के साथ हैं।
रो खन्ना ने धार्मिक आधार पर की जाने वाली नफरत और कट्टरता के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे घृणित कृत्यों की बिना किसी शर्त के निंदा होनी चाहिए।
बताया गया है कि बांग्लादेश के भालुका इलाके में 18 दिसंबर को ईशनिंदा के आरोप लगाकर भीड़ ने दीपू चंद्र दास पर हमला किया था। आरोप है कि उसे पीट-पीटकर मार डाला गया और बाद में उसके शव को जला दिया गया। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
इस हत्या के बाद बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंताएं और गहराई हैं। विभिन्न मानवाधिकार और एडवोकेसी समूहों का दावा है कि हाल के दिनों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा, तोड़फोड़ और धमकियों की घटनाओं में वृद्धि हुई है।
हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग ने किसी विशेष राजनयिक वार्ता का विवरण साझा नहीं किया है, लेकिन उसने दोहराया कि अमेरिका धार्मिक हिंसा की कड़ी निंदा करता है और बांग्लादेश में सभी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों के समर्थन में खड़ा है।