कोयला नगरी धनबाद में हरित क्रांति: दुर्लभ फलों की खेती से नई पहचान

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धनबाद: कोयला राजधानी के नाम से प्रसिद्ध धनबाद अब केवल खनन और उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी हरियाली और अनोखी खेती के लिए भी पहचान बना रहा है। इस बदलाव के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है जय धरती माँ फाउंडेशन की टीम, जो पिछले करीब 15 वर्षों से धनबाद में हरित अभियान और दुर्लभ फलों की खेती को बढ़ावा दे रही है।

फाउंडेशन ने अपने प्रयासों से लोगों को यह संदेश दिया है कि कोयले की धरती पर भी हरियाली की नई इबारत लिखी जा सकती है। धनबाद के भूली धारजोड़िया स्थित उनके प्रशिक्षण कार्यालय और फार्म में आज कई महंगे और दुर्लभ फलों तथा लकड़ी की प्रजातियाँ देखने को मिलती हैं, जो लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

यहाँ देश-विदेश में प्रसिद्ध मियाजाकी आम की खेती की जा रही है, जिसकी कीमत बाजार में लाखों रुपये तक बताई जाती है। इसके अलावा यहाँ अगर वुड (अवर वुड) जैसे बहुमूल्य वृक्ष भी लगाए गए हैं, जिसकी लकड़ी और तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी महंगे दामों पर बिकते हैं। इन पौधों और फलों को देखने तथा उनके बारे में जानकारी लेने के लिए दूर-दूर से लोग यहाँ पहुंच रहे हैं।

फाउंडेशन के सदस्यों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल खेती करना नहीं, बल्कि लोगों को कृषि के नए और लाभकारी विकल्पों से जोड़ना है। इसी उद्देश्य से अब संस्था एक अनोखी पहल करने जा रही है। लोगों को जागरूक करने और अधिक से अधिक युवाओं को खेती से जोड़ने के लिए मात्र 1 रुपये में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में लोगों को आधुनिक फल खेती, दुर्लभ पौधों की देखभाल, जैविक खेती और कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। फाउंडेशन का मानना है कि अगर युवा खेती की ओर आकर्षित होंगे तो न सिर्फ उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

जय धरती माँ फाउंडेशन की यह पहल अब धनबाद में एक हरित क्रांति की तरह देखी जा रही है। कोयले के लिए मशहूर इस शहर में हरियाली और बहुमूल्य फलों की खेती का यह प्रयोग लोगों को नई दिशा दे रहा है और आने वाले समय में धनबाद की पहचान को और भी व्यापक बना सकता है।
बाइट-रवि निषाद-संस्थापक-जय धरती मां फाउंडेशन
बाइट-सहदेव महतो-जिला सचिव- जय धरती मां फाउंडेशन
बाइट-डॉ रवीन्द्र विश्वकर्मा- संरक्षक-जय धरती मां फाउंडेशन

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