केन्दुआडीह में 15 दिनों के खौफ के बाद जगी उम्मीद, गैस रिसाव रोकने के लिए वैज्ञानिक प्रक्रिया शुरू
धनबाद के केन्दुआडीह क्षेत्र में पिछले दो सप्ताह से जारी जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के रिसाव पर काबू पाने के लिए मंगलवार से ठोस तकनीकी प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इस घटना के कारण अब तक दो लोगों की जान जा चुकी है और कई बीमार हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों ने इस इलाके को ‘खतरनाक जोन’ घोषित कर घरों पर चेतावनी पोस्टर लगा दिए थे, जिसके बाद लोग राहत शिविरों या रिश्तेदारों के यहां जाने को मजबूर हो गए।
अब 15वें दिन, एमईसीएल (मिनरल एक्सप्लोरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड) ने केन्दुआडीह थाने के पास बोरहोल ड्रिलिंग का काम शुरू किया है, जिससे लोगों में राहत की उम्मीद जगी है। इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी सीएमपीडीआई, आईआईटी-आईएसएम, पीएमआरसी और सिम्फर जैसी शीर्ष संस्थाओं के विशेषज्ञ कर रहे हैं। सुरक्षा के मद्देनजर सीआईएसएफ ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर रखी है और आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बोरहोल के माध्यम से पहले जमीन के नीचे धधक रही आग और गैस की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके बाद, आग को ठंडा करने और गैस उत्सर्जन को रोकने के लिए नाइट्रोजन गैस भरी (नाइट्रोजन फिलिंग) जाएगी। इसके लिए नाइट्रोजन का स्टॉक पहले ही मंगवा लिया गया है। जानकारों का मानना है कि यह वैज्ञानिक तरीका गैस रिसाव को रोकने में कारगर साबित होगा।