साइबर अपराध रोकने के लिए बैंकों की निगरानी बढ़ेगी, म्यूल बैंक खातों के फिजिकल वेरिफिकेशन पर जोर

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धनबाद में बैंक प्रबंधकों के साथ ग्रामीण एसपी की बैठक……………

नए खातों की समय-समय पर होगी जांच………………

संदिग्ध खातों की सूचना पुलिस को देने पर बनी सहमति…………..

धनबाद में साइबर अपराध पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस ने बैंकों के साथ मिलकर निगरानी बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। साइबर सेफ्टी अवेयरनेस वीक के तहत बुधवार को धनबाद समाहरणालय स्थित पुलिस सभागार में विभिन्न बैंकों के प्रबंधकों के साथ बैठक हुई। बैठक में खास तौर पर म्यूल बैंक अकाउंट, फर्जी सिम और चोरी के मोबाइल फोन के जरिए होने वाले साइबर अपराध पर चर्चा की गई। पुलिस ने बैंकों से नए बैंक खातों की समय-समय पर फिजिकल वेरिफिकेशन कराने और संदिग्ध खातों की जानकारी पुलिस को देने की अपील की है।

साइबर अपराध पर प्रभावी रोक लगाने के लिए धनबाद पुलिस लगातार कई स्तरों पर काम कर रही है। इसी कड़ी में साइबर सेफ्टी अवेयरनेस वीक के तहत बुधवार को पुलिस सभागार में बैंक प्रबंधकों के साथ बैठक आयोजित की गई।

ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने बताया कि साइबर अपराध के लिए चोरी के मोबाइल फोन, दूसरे लोगों के नाम पर जारी फर्जी सिम कार्ड और म्यूल बैंक अकाउंट का इस्तेमाल बड़ी चुनौती है। यदि इन तीनों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जाती है तो साइबर अपराधियों के लिए अपराध करना काफी मुश्किल हो सकता है।

बैठक में सबसे ज्यादा जोर म्यूल बैंक खातों पर दिया गया। ऐसे बैंक खाते जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़े लेनदेन के लिए किया जाता है, उनकी पहचान और रोकथाम के लिए बैंक स्तर पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने पर चर्चा हुई।

बैंकों ने सहमति जताई है कि नए खुले बचत खातों का समय-समय पर फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाएगा। खाताधारकों को बैंक बुलाकर उनके मोबाइल नंबर और अन्य विवरणों की जांच की जाएगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि खाता संबंधित व्यक्ति ने स्वयं खोला है या किसी दूसरे व्यक्ति ने उसके नाम पर खाता खुलवाया है।

पुलिस के अनुसार कई मामलों में लोगों को पैसे या कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते हैं। कुछ लोग जानबूझकर ऐसा करते हैं, जबकि कई लोग साइबर अपराध के पूरे नेटवर्क से अनजान होते हैं और बाद में इसका हिस्सा बन जाते हैं।

ग्रामीण एसपी ने कहा कि बैंक खाता खोलना बैंक अधिकारियों के लिए रोकना संभव नहीं है, यदि दस्तावेज और जानकारी वैध हैं। ऐसे में फिजिकल वेरिफिकेशन अतिरिक्त सतर्कता की एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी बैंक को कोई खाता संदिग्ध या म्यूल अकाउंट प्रतीत होता है तो उसकी जानकारी थाना, डीएसपी या सीधे पुलिस अधिकारियों को दी जा सकती है। इसके आधार पर पुलिस आगे की जांच और कार्रवाई करेगी।

धनबाद के सिंदरी अनुमंडल क्षेत्र के बैंक प्रबंधकों के साथ यह बैठक हुई है। पुलिस अब बाघमारा और निरसा समेत अन्य अनुमंडलों के बैंक प्रबंधकों के साथ भी इसी तरह बैठक कर साइबर अपराध के खिलाफ संयुक्त रणनीति तैयार करेगी।

ग्रामीण एसपी ने बताया कि म्यूल बैंक अकाउंट, फर्जी सिम कार्ड और चोरी के मोबाइल साइबर अपराध के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन पर रोक लगाने के लिए पुलिस और बैंक मिलकर काम करेंगे। नए खातों के फिजिकल वेरिफिकेशन और संदिग्ध खातों की सूचना पुलिस को देने से साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण में मदद मिलेगी।

पुलिस का मानना है कि बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त सतर्कता बढ़ने से साइबर अपराधियों के लिए फर्जी या म्यूल खातों का इस्तेमाल करना मुश्किल होगा। वहीं, बैंक और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय से संदिग्ध लेनदेन की पहचान कर समय रहते कार्रवाई भी की जा सकेगी।

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