धनबाद अंचल कार्यालय में जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) की प्रक्रिया भ्रष्टाचार का शिकार हो चुकी है। दलालों और अंचल कर्मियों की मिलीभगत से दाखिल-खारिज और एलपीसी (लैंड पˈज़े̮श्न् सर्टिफिकेट) निर्गत करने के नाम पर हजारों से लेकर लाखों रुपये तक की अवैध वसूली का आरोप लगा है।
जेएमएम यू महानगर अध्यक्ष जे.पी. वालिया ने सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) 2005 के तहत अंचल कार्यालय धनबाद से पांच महत्वपूर्ण सवालों का जवाब मांगा है, जिसमें यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि:
1. धनबाद अंचल में एलपीसी निर्गत करने में कितना समय लगता है?2. जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक कुल कितनी एलपीसी निर्गत की गई और किन लोगों के नाम पर जारी हुई?3. ये एलपीसी कब-कब अंचल कार्यालय से ऑनलाइन निबंधन कार्यालय भेजी गई?4. एलपीसी निर्गत करने के लिए कितनी राशि निर्धारित है और इसमें भ्रष्टाचार की क्या भूमिका है?5. म्यूटेशन और एलपीसी निर्गत से जुड़े दलालों की क्या भूमिका है और कितनी रकम की उगाही हो रही है?
सूत्रों के अनुसार, धनबाद अंचल कार्यालय में 1 से 10 डिसमिल तक की जमीन के लिए ₹8,000 और 11 डिसमिल से अधिक होने पर ₹30,000 तक की घूस तय की गई है। बड़े मामलों में रकम ₹1.5 लाख तक पहुंच जाती है। यह पूरा खेल बिचौलियों और अंचल कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहा है।
1 अप्रैल 2024 से 17 जनवरी 2025 तक कुल 6,383 म्यूटेशन आवेदन आए, लेकिन केवल 1,756 को स्वीकृति मिली। 2,484 आवेदन अब भी लंबित हैं 2,484 को सीधे रिजेक्ट कर दिया गयाआवेदकों का आरोप है कि यदि दलालों को रिश्वत नहीं दी जाती, तो 90 दिनों के भीतर फाइल रिजेक्ट कर दी जाती है।
वंदे भारत न्यूज ने पहले भी इस भ्रष्टाचार को उजागर किया था, लेकिन अंचल अधिकारी ने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया। शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
“बीडीओ-सीओ गलत करेंगे, तो जाएंगे जेल”मुख्यमंत्री ने झारखंड में जमीन दलाली और सरकारी अफसरों की अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि “अगर कोई बीडीओ-सीओ गलत करेगा, तो उसे तुरंत जेल भेजा जाएगा। झारखंड के आदिवासियों और मूलवासियों के हक की जमीन पर कोई कब्जा नहीं कर सकता।”
जे.पी. वालिया ने झारखंड सरकार, मुख्य सचिव और धनबाद उपायुक्त से मामले की जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस बड़े घोटाले पर कोई कार्रवाई करेगा, या फिर आम जनता यूं ही शोषण का शिकार होती रहेगी?