पटना में नीट परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा की हत्या के मामले में अब जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की सिफारिश की गई है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस संबंध में केंद्र सरकार को औपचारिक पत्र भेजकर अनुरोध किया है। इसकी जानकारी उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से दी।
सम्राट चौधरी ने बताया कि चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र में दर्ज नीट छात्रा हत्याकांड (कांड संख्या 14/26) की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई जांच की अनुशंसा की गई है। उन्होंने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और इसका सही तरीके से खुलासा होना जरूरी है।
घटना को 17 दिन बीत जाने के बावजूद बिहार पुलिस अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। इस बीच, पीड़िता के परिजनों ने विशेष जांच दल (SIT) की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिवार का आरोप है कि पुलिस मामले की जांच सही दिशा में नहीं कर रही है।
शुक्रवार को मृत छात्रा की मां ने पुलिस महानिदेशक विनय कुमार से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद वे काफी आक्रोशित नजर आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस पर उनका भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है और यहां से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। परिजनों और उनके अधिवक्ता का कहना है कि डीजीपी ने उनसे कहा कि यह मामला दुष्कर्म का नहीं बल्कि आत्महत्या का प्रतीत होता है और उन्हें इसे स्वीकार करना चाहिए। इसके बाद उन्हें गृह मंत्री से मिलने की सलाह दी गई।
इधर, फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट में छात्रा के अंडरगारमेंट्स से पुरुष स्पर्म के अंश मिलने की पुष्टि हुई है। इसके बाद SIT ने बड़े पैमाने पर डीएनए जांच शुरू कर दी है। अब तक परिजनों सहित 30 से अधिक लोगों के ब्लड सैंपल लिए जा चुके हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी दुष्कर्म की आशंका से पूरी तरह इनकार नहीं किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा के शरीर पर खरोंच के निशान भी पाए गए हैं।
शुक्रवार शाम गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने अपने आवास पर मुख्य सचिव और डीजीपी को बुलाकर जांच की प्रगति की समीक्षा की और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद मामले को सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया गया। अब सीबीआई इस केस में नया मामला दर्ज कर स्वतंत्र रूप से जांच करेगी। हालांकि, इससे पहले पीड़ित परिवार की ओर से सीबीआई जांच की कोई लिखित मांग नहीं की गई थी।