भारतीयों के वर्क परमिट रद्द करो’ — उस्मान हादी के छात्र गुट का अल्टीमेटम, कितना पड़ेगा असर?

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ढाका (बांग्लादेश):
बांग्लादेश में भारत विरोधी माहौल अब एक नए और गंभीर स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। छात्र नेता और भारत के मुखर आलोचक उस्मान हादी की हत्या के बाद मामला अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने कूटनीतिक तनाव का रूप ले लिया है। हादी से जुड़े छात्र संगठन ‘इंकलाब मंच’ ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए भारतीय नागरिकों को लेकर विवादित मांग सामने रखी है।

छात्र संगठन की चेतावनी है कि यदि उस्मान हादी की हत्या के आरोपियों को जल्द बांग्लादेश वापस नहीं लाया गया, तो देश में कार्यरत सभी भारतीय नागरिकों के वर्क परमिट रद्द कर दिए जाएं। यह बयान ऐसे समय आया है, जब बांग्लादेश पुलिस दावा कर रही है कि हत्या के आरोपी भारत भाग चुके हैं।

पुलिस के बयान से भड़का मामला

विवाद की शुरुआत रविवार को तब हुई, जब ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी एस. एन. नजरुल इस्लाम ने मीडिया को बताया कि उस्मान हादी हत्याकांड के मुख्य संदिग्ध फैसल करीम मसूद और आलमगीर शेख घटना के बाद सीमा पार कर भारत में दाखिल हो गए। पुलिस के अनुसार, दोनों 12 दिसंबर को हमले के तुरंत बाद हलुआघाट सीमा के जरिए भारत पहुंचे और मेघालय में प्रवेश किया। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि सीमा पर दो भारतीय नागरिकों ने उन्हें सहायता प्रदान की।

इस बयान के सामने आते ही बांग्लादेश में पहले से मौजूद तनाव और तेज हो गया। हादी के समर्थक छात्र संगठन ‘इंकलाब मंच’ ने सड़कों पर उतरकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

भारत ने आरोपों को नकारा

भारत ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया है। भारतीय खुफिया एजेंसियों, मेघालय पुलिस और सीमा सुरक्षा बल ने जांच के बाद स्पष्ट किया है कि आरोपी भारत में प्रवेश नहीं कर पाए हैं। भारत का कहना है कि बांग्लादेश की ओर से लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश मात्र हैं।

सड़कों पर गुस्सा और अव्यवस्था

उस्मान हादी की हत्या के बाद ढाका में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। ‘इंकलाब मंच’ के कार्यकर्ताओं ने राजधानी के शाहबाग चौराहे को प्रदर्शन स्थल बना लिया है, जहां रोजाना दोपहर के बाद सड़क जाम की जा रही है। विरोध प्रदर्शनों में अब छात्र ही नहीं, बल्कि महिलाएं और बच्चे भी शामिल हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों द्वारा उन मीडिया संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों को निशाना बनाया जा रहा है, जिन्हें वे भारत समर्थक मानते हैं। कुछ इलाकों से आगजनी की घटनाओं की खबरें भी सामने आई हैं।

यह विरोध केवल ढाका तक सीमित नहीं रहा है। सिलहट समेत कई अन्य शहरों में भी इसी तरह के प्रदर्शन देखे जा रहे हैं।

भारत के लिए चिंता का कारण

बांग्लादेश में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक आईटी, गारमेंट उद्योग, प्रबंधन और तकनीकी क्षेत्रों में कार्यरत हैं। यदि अंतरिम सरकार दबाव में आकर वर्क परमिट को लेकर कोई कठोर फैसला लेती है, तो इसका असर केवल हजारों भारतीय पेशेवरों पर ही नहीं, बल्कि भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंधों पर भी गंभीर रूप से पड़ सकता है।

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