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भारतीय मजदूर संघ ने चारों श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन का किया स्वागत

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धनबाद। केंद्र सरकार द्वारा लंबे समय से लंबित चार श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन के फैसले का भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय को संघ ने श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

“चारों संहिताएँ—श्रमिक हित में ऐतिहासिक कदम” : उमेश कुमार सिंह

धनबाद कोलियरी कर्मचारी संघ (भारतीय मजदूर संघ) के महामंत्री एवं कोल इंडिया सुरक्षा बोर्ड सदस्य उमेश कुमार सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि भारत सरकार ने राष्ट्रहित, उद्योग हित और मजदूर हित को ध्यान में रखते हुए श्रम संहिताओं को लागू किया है।

उन्होंने कहा कि कुछ श्रमिक संगठन इन संहिताओं के खिलाफ भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, जो श्रमिक वर्ग के हित में उचित नहीं है। इसी कारण धनबाद कोलियरी कर्मचारी संघ ने स्वयं को ऐसे विरोध से पूर्ण रूप से अलग रखा है।

21 नवंबर 2025 को श्रम संहिताओं को मिली मंजूरी

उमेश कुमार सिंह ने बताया कि 21 नवंबर 2025 को भारत सरकार ने श्रम सुधारों के तहत चारों श्रम संहिताओं को आधिकारिक मान्यता प्रदान की है।
उन्होंने कहा कि BMS कार्यकर्ता अपने-अपने कार्यस्थलों पर श्रमिकों को संहिताओं की स्पष्ट जानकारी देकर दिग्भ्रमित होने से बचाने का काम कर रहे हैं।
BMS एक गैर-राजनीतिक, श्रमिकों द्वारा संचालित केंद्रीय श्रम संगठन है जो पूरी तरह श्रमिक हितों के लिए कार्य करता है।

“नई श्रम संहिताएँ आधुनिक श्रम बाजार की जरूरतों के अनुसार” : मुरारी तांती

संघ के अध्यक्ष एवं केंद्रीय सलाहकार समिति सदस्य मुरारी तांती ने कहा कि चारों श्रम संहिताओं को देश के बदलते और उभरते श्रम बाज़ार की वास्तविकताओं के अनुरूप बदला गया है।

उन्होंने बताया कि—

  • निर्धारित रोजगार सीमा से आगे वेतन कवरेज का विस्तार,
  • असंगठित एवं नए क्षेत्रों तक सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाना,
  • आधुनिक कार्यबल की आकांक्षाओं के अनुरूप सुधार,

—ये सभी उपाय श्रमिक हित की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने बताया कि बीसीसीएल कंपनी स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में भी इन संहिताओं को लागू किए जाने पर सहमति जताई गई है।

“भारत की श्रमिक व्यवस्था में मील का पत्थर” — BMS

भारतीय मजदूर संघ ने कहा कि वह सरकार एवं सभी संबंधित पक्षों के साथ सतत संवाद करता रहेगा ताकि श्रमिक कल्याण श्रम शासन का केंद्र बना रहे।
संघ का मानना है कि ये श्रम संहिताएँ भारत में समावेशी, न्यायसंगत और सशक्त श्रमिक व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होंगी।

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