धनबाद: सीईओ की नियुक्ति टलने से झरिया पुनर्वास की रफ्तार धीमी, मंत्रालय ने जताई चिंता
धनबाद(DHANBAD): झरिया पुनर्वास परियोजना एक बार फिर प्रशासनिक शून्यता के कारण धीमी पड़ गई है। परियोजना के लिए नियुक्त किए जाने वाले मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी (CEO) की तैनाती अब तक न होने से कई महत्वपूर्ण निर्णय लंबित हैं, जिसके कारण पुनर्वास कार्य निर्धारित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
दो दिवसीय निरीक्षण पर धनबाद पहुंचे कोयला मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी हिटलर सिंह ने आग और भू-धंसान से प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। बीसीसीएल और जेआरडीए के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में उन्होंने परियोजना पर हो रही देरी को गंभीरता से लेते हुए कई सवाल उठाए। मंत्रालय के भीतर से मिली जानकारी के अनुसार, अधिकारी अपनी विस्तृत रिपोर्ट दिल्ली भेजेंगे और इसमें सीईओ की तत्काल नियुक्ति को सबसे जरूरी कदम बताया जाएगा।
सीईओ की तैनाती अटकी, फैसले रुके
संशोधित मास्टर प्लान के अनुमोदन के वक्त यह तय किया गया था कि पुनर्वास कार्यों की मॉनिटरिंग, बीसीसीएल–जेआरडीए के बीच समन्वय और नीति-निर्माण की प्रक्रिया को सुचारू रखने के लिए एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को सीईओ बनाया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर यह नियुक्ति करनी है, लेकिन राज्य स्तर पर इस प्रक्रिया में देरी हो रही है।
इसी वजह से कई महत्वपूर्ण टेंडर, निर्माण कार्य और नीतिगत फैसले रुके पड़े हैं। पुनर्वास की गति जून में मास्टर प्लान मंजूर होने के बाद जैसी अपेक्षित थी, वैसी नहीं दिख रही है।
बीसीसीएल कर्मियों का पुनर्वास अंतिम चरण में, दूसरे परिवार प्रतीक्षा में
पहले चरण के तहत भूमिगत आग वाले अति जोखिम वाले क्षेत्रों से बीसीसीएल कर्मियों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।
- प्रभावित 648 परिवारों में से 425 परिवारों को 25 अक्टूबर 2025 तक सुरक्षित क्वार्टर उपलब्ध करा दिए गए हैं।
- शेष परिवारों को दिसंबर तक हर हाल में स्थानांतरित करने का लक्ष्य रखा गया है।
लेकिन गैर-बीसीसीएल परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया अभी गति नहीं पकड़ सकी है, जबकि यह पूरे मास्टर प्लान का सबसे चुनौतीपूर्ण और बड़ा हिस्सा है।
बेलगड़िया में सुविधा बहाली जारी
जेआरडीए अधिकारियों ने मंत्रालय को बताया कि बेलगड़िया पुनर्वास स्थल पर सड़क, पानी, बिजली समेत बेसिक सुविधाओं को दुरुस्त करने का काम चल रहा है। सुविधाएं पूरी होने के बाद आम प्रभावित परिवारों को वहां शिफ्ट किया जाएगा।
मंत्रालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पुनर्वास की प्रगति की समीक्षा भी की, जिसमें आगाह किया गया कि देरी से हजारों परिवार खतरे में बने हुए हैं।
595 प्रभावित क्षेत्रों में से 81 अति संवेदनशील
झरिया क्षेत्र में कुल 595 आग और भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र हैं, जिनमें से
81 क्षेत्र को सबसे अधिक जोखिम वाला घोषित किया गया है।
इन 81 क्षेत्रों में
- 14,460 परिवार रहते हैं
- जिनमें 1,860 रैयत
- और करीब 12,600 अवैध कब्जाधारी शामिल हैं।
इन सभी को सुरक्षित स्थानों पर बसाना बीसीसीएल और जेआरडीए की संयुक्त जिम्मेदारी है।
जून 2025 में मास्टर प्लान को मिली मंजूरी
भारत सरकार ने 25 जून 2025 को 5,940 करोड़ रुपये की लागत वाले संशोधित झरिया मास्टर प्लान को मंजूरी दी थी।
इस योजना में—
- भूमिगत आग से निपटना
- भू-धंसान रोकना
- प्रभावित लोगों के पुनर्वास
- और नई बस्तियों में आधारभूत सुविधाओं का विकास
जैसे बड़े लक्ष्य शामिल हैं।
सड़क, पानी, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और आजीविका समर्थन जैसी आवश्यक सुविधाओं का प्रावधान भी इस योजना का हिस्सा है।
मंत्रालय की सख्त चेतावनी: समय पर करें पुनर्वास
मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि
“सुरक्षित पुनर्वास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है”
और देरी को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अंडर सेक्रेटरी हिटलर सिंह ने निरीक्षण के दौरान जो संकेत दिए, उससे साफ है कि
सीईओ की नियुक्ति अब बिना देरी किए की जाएगी,
ताकि परियोजना फिर से गति पकड़ सके।