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“पाकुड़ में करोड़ों साल पुराने पत्तों के जीवाश्म मिले, संरक्षण की पहल”

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पाकुड़ (PAKUR):
झारखंड का पाकुड़ जिला एक बार फिर से वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की रुचि का केंद्र बन गया है। लिट्टीपाड़ा प्रखंड के चितलो इलाके में वन विभाग की टीम को ज़मीन की सतह पर दुर्लभ किस्म के पत्तों के छाप जैसे जीवाश्म मिले हैं, जिन्हें विशेषज्ञ करोड़ों वर्ष पुराना मान रहे हैं।

वन संरक्षक सौरभ चंद्रा के निर्देश पर किए गए इस सर्वे में वन क्षेत्र पदाधिकारी रामचंद्र पासवान, वन्यजीव विशेषज्ञ अली जिब्रान, वनरक्षी अनुपम कुमार यादव और पशु रक्षक साहेब राम शामिल थे। टीम ने निरीक्षण के दौरान कई स्थलों पर मिट्टी और पत्थरों में स्पष्ट पत्तियों के निशान खोज निकाले।

इन नमूनों को फोटो और वीडियो के जरिए जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) के वैज्ञानिक सौरभ पाल तक भेजा गया। प्राथमिक जाँच के बाद वैज्ञानिक पाल ने माना कि यह खोज अत्यंत पुरानी है और इन अवशेषों को तत्काल सुरक्षित किए जाने की आवश्यकता है।

वन विभाग ने अब इन जीवाश्मों की सुरक्षा की पहल शुरू कर दी है। गौरतलब है कि पाकुड़ जिले के सोनाजोड़ी और बरमसिया गांवों में भी पहले ऐसी ही खोजें की गई थीं, जिनका संरक्षण अभी भी जारी है।

इस नई खोज के कारण पाकुड़ न सिर्फ भूवैज्ञानिक अध्ययन के लिए अहम स्थल के रूप में उभर रहा है बल्कि शैक्षणिक अनुसंधान की दृष्टि से भी इसकी अहमियत और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यहाँ और भी प्राचीन जीवाश्म छिपे हो सकते हैं, जिनका पता लगना बाकी है

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