पलामू के जंगलों में लौटा ‘शेरदिल’ बाघ, फिर गूंजा दहाड़ों का जंगल…

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झारखंड (JHARKHAND):
पलामू टाइगर रिजर्व की शांत वादियों में इन दिनों नई हलचल महसूस की जा रही है। रिजर्व के कैमरा ट्रैप में हाल ही में एक करीब चार वर्ष का जवान नर बाघ दर्ज हुआ है। उसकी चाल, उसकी झलक — जैसे जंगल की आत्मा फिर से जाग उठी हो। कई वर्षों बाद टाइगर की दहाड़ से यह वन क्षेत्र एक बार फिर जीवंत हो गया है।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यह नया बाघ यहां का सातवां सदस्य बन गया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह बाघ मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ या छत्तीसगढ़ के किसी जंगल से पलामू तक पहुंचा है। यह उपस्थिति बाघ संरक्षण के लिहाज से बेहद उत्साहजनक मानी जा रही है, क्योंकि साल 2018 में यहां एक भी बाघ नहीं था। उसके बाद हालात धीरे-धीरे बदले — 2020 में एक बाघिन का शव मिला, 2021 में पहली बार एक जीवित बाघ दिखा, और अब 2025 में सात बाघों की मौजूदगी दर्ज हो चुकी है।

वन उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना ने बताया कि बाघों की बढ़ती संख्या वन्य जीवन के लिए शुभ संकेत है। उनके अनुसार, “यह सिर्फ बाघ की वापसी नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्जीवन का प्रतीक है।” सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि जंगल में इंसान और बाघ के बीच संतुलन बना रहे — क्योंकि असली जंगल वही है, जहां दोनों सुरक्षित हों और प्रकृति की लय बरकरार रहे।

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