धनबाद: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के डिपार्टमेंट ऑफ माइनिंग इंजीनियरिंग के फैकल्टी प्रो. मैत्रेय मोहन साहू ने बॉक्साइट और रेड मड की हाइपरस्पेक्ट्रल कैरेक्टराइजेशन पर अपनी रिसर्च को 2026 आईईईई इंटरनेशनल जियोसाइंस एंड रिमोट सेंसिंग सिम्पोजियम (आईजीएआरएसएस 2026) में प्रस्तुत किया। दुनिया के प्रमुख जियोसाइंस और रिमोट सेंसिंग सिम्पोजियम में शामिल आईजीएआरएसएस 2026 का आयोजन 9 से 14 अगस्त तक वॉशिंगटन डीसी, अमेरिका में हुआ।
पोस्टर प्रेजेंटेशन के जरिए सामने लाई गई इस स्टडी में एनमैप (एनवायरनमेंटल मैपिंग एंड एनालिसिस प्रोग्राम) से मिले सैटेलाइट-बेस्ड हाइपरस्पेक्ट्रल ऑब्जर्वेशन का इस्तेमाल किया गया। एनमैप एक हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट मिशन है, जिसके जरिए अलग-अलग पदार्थों की स्पेक्ट्रल प्रॉपर्टीज को डिटेल में समझा जा सकता है।
रिसर्च में विजिबल और इंफ्रारेड वेवलेंथ रेंज में बॉक्साइट और रेड मड के स्पेक्ट्रल कैरेक्टरिस्टिक्स और उनकी सेपरेबिलिटी का अध्ययन किया गया। खास तौर पर एल्युमिनियम और आयरन हाइड्रॉक्सिल से जुड़े डायग्नोस्टिक स्पेक्ट्रल फीचर्स और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिशन पर फोकस किया गया, जिससे दोनों पदार्थों के स्पेक्ट्रल बिहेवियर को समझने में मदद मिली।
“हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग की मदद से खनिज और खनन से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को उनकी स्पेक्ट्रल प्रॉपर्टीज के आधार पर पहचानना और अलग करना संभव है। यह टेक्नोलॉजी खनिज खोज, खनन अपशिष्ट के आकलन और पर्यावरण की निगरानी के लिए एक नॉन-इनवेसिव और इफेक्टिव तरीका उपलब्ध करा सकती है,” प्रो. मैत्रेय मोहन साहू ने कहा।
स्टडी के मुताबिक, इस रिसर्च का इस्तेमाल खनिज खोज, खनन अपशिष्ट के कैरेक्टराइजेशन और पर्यावरण निगरानी में किया जा सकता है। रिमोट सेंसिंग डेटा के जरिए खनिजों में होने वाले बदलाव और खनन अपशिष्ट की संरचना को समझने में भी यह तकनीक उपयोगी हो सकती है।
प्रो. साहू के स्पेशलाइजेशन में रिमोट सेंसिंग, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस), डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग, जियोलॉजिकल स्पेक्ट्रोस्कोपी और स्पेक्ट्रल मिक्सिंग एवं अनमिक्सिंग शामिल हैं। उनके रिसर्च इंटरेस्ट में खनिज मैपिंग, अयस्क के आकलन और स्मार्ट माइनिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व मशीन लर्निंग का इस्तेमाल भी शामिल है।
प्रो. साहू ने 2016 में एनआईटी राउरकेला से माइनिंग इंजीनियरिंग में ऑनर्स किया और 2024 में आईआईटी बॉम्बे के सेंटर ऑफ स्टडीज इन रिसोर्सेज इंजीनियरिंग से जियोइन्फॉर्मेटिक्स एंड नेचुरल रिसोर्सेज इंजीनियरिंग में पीएचडी पूरी की। उन्होंने प्राइम मिनिस्टर रिसर्च फेलोशिप (पीएमआरएफ) के तहत अपनी पीएचडी की। इसके अलावा उन्होंने इजरायल की हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम में एडवांस्ड रिमोट सेंसिंग रिसर्च का अनुभव हासिल किया है और कोल इंडिया लिमिटेड में भी काम कर चुके हैं।