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“झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह बोले— भाई की हत्या में मेरा नाम आना जीवन का सबसे बड़ा दुख”

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धनबाद(DHANBAD): झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह ने शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि नीरज सिंह की हत्या के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। उन्होंने कहा कि इस घटना ने उनके परिवार और राजनीतिक जीवन दोनों को गहरा आघात पहुँचाया, लेकिन वर्षों से चली आ रही कानूनी प्रक्रिया ने अंततः कई भ्रम दूर कर दिए।

संजीव सिंह ने कहा कि परिवार के भीतर किसी भी तरह का मतभेद नहीं था, परंतु हत्या के बाद जो स्थितियाँ बनीं, उन्होंने रिश्तों के भावनात्मक पहलुओं को झकझोर कर रख दिया। उन्होंने कहा, “घटना के बाद कई तरह की बातें उठीं, कई प्रश्न खड़े हुए। लोग क्या सोच रहे हैं, क्या मान रहे हैं… इन सबका असर मन पर पड़ता है, लेकिन समय के साथ हमने धैर्य बनाकर रखा।”

उन्होंने बताया कि वह वर्षों तक राजनीतिक दबाव, कानूनी लड़ाई और स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझते रहे। “राजनीति में रहना आसान नहीं होता। कई बार ऐसी परिस्थितियाँ बनती हैं जो आपके नियंत्रण में नहीं होतीं। लेकिन मैंने हमेशा कानून और सिस्टम पर भरोसा रखा,” सिंह ने कहा।

पूर्व विधायक ने माना कि जेल से बाहर आने के बाद उन्हें जनता से दोबारा जुड़ने में समय लगा, क्योंकि परिस्थितियाँ बदल चुकी थीं। “राजनीति में रहकर भी कभी-कभी लोगों से दूरी बन जाती है। अब मैं उस दूरी को कम करने का प्रयास कर रहा हूँ,” उन्होंने कहा।

रागिनी सिंह की सक्रियता पर बोलते हुए संजीव सिंह ने कहा कि चुनाव परिणाम से इतर, लोगों के बीच मौजूद रहना ही राजनीति की वास्तविक पहचान है। “रागिनी ने हमेशा जनता के मुद्दों पर काम किया है। हमारे परिवार में यह परंपरा रही है कि चुनाव चाहे जीते या हारें, जनता से संपर्क कभी नहीं टूटना चाहिए,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपनी भावी राजनीतिक भूमिका को लेकर वे अभी जल्दबाज़ी में कोई घोषणा नहीं करेंगे। “स्वास्थ्य और हालात—इन दोनों को देखते हुए ही आगे की रणनीति पर विचार होगा,” उन्होंने कहा।

सिंह ने बताया कि घटना की जांच को लेकर उन्होंने समय-समय पर कानूनी सलाह ली, और अदालत के सभी निर्णयों का सम्मान किया। “कई वर्षों तक मामला अदालत में चला। किस तरह की जांच होनी चाहिए, किस एजेंसी को करनी चाहिए—यह सब अदालत और सरकार के स्तर पर तय होता है। हम सिर्फ अपना पक्ष रखते हैं और भरोसा करते हैं कि अंत में सच ही सामने आता है,” उन्होंने कहा।

नीरज सिंह और अन्य तीन लोगों की 2017 में हुई हत्या पर उन्होंने कहा कि यह घटना पूरे शहर के लिए दुखदायी थी और इससे राजनीतिक माहौल भी प्रभावित हुआ। “यह घटना सिर्फ परिवार की नहीं, पूरे धनबाद की पीड़ा थी,” सिंह ने कहा।

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