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‘मैं किसी को मार डालूंगी…’ — प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सिगरेट लत: छोड़ने में क्यों असफल?

जब दुनिया के ताकतवर नेता गाज़ा में शांति बहाल करने के लिए मिस्र के शहर शर्म अल-शेख में माथापच्ची कर रहे थे, उसी वक्त तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच एक अलग ही किस्सा चल रहा था। जैसे ही एर्दोगन ने अपने विमान से कदम रखा, उन्होंने मुस्कराते हुए मेलोनी से कहा — “अपनी सेहत का ध्यान रखो, धूम्रपान छोड़ दो।”
मेलोनी ने भी मज़ाकिया लहजे में जवाब दिया — “मुझे पता है, लेकिन अगर मैंने सिगरेट छोड़ दी तो शायद किसी को जान से मार दूं!”
इतना सुनते ही फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों भी बातचीत में कूद पड़े — “ये तो असंभव है!” और फिर तीनों नेताओं की यह हल्की-फुल्की नोकझोंक का वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर छा गया।

सिगरेट का ‘कूटनीतिक रिश्ता’

जॉर्जिया मेलोनी की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं — मामूली पृष्ठभूमि से निकलकर इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनना कोई आसान सफर नहीं था। मगर उनकी एक आदत है जो उनसे अब भी नहीं छूटी — स्मोकिंग
अपनी आत्मकथा ‘आई एम जॉर्जिया’ में उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि उन्होंने एक वक्त सिगरेट छोड़ दी थी, लेकिन कुछ सालों बाद फिर इसकी ओर लौट आईं। वजह? मेलोनी के मुताबिक, “सिगरेट कई बार बातचीत की शुरुआत कर देती है, नेताओं के बीच जुड़ाव बनाने में मदद करती है।”
दिलचस्प बात ये है कि उनकी किताब की भूमिका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखी है।

मेलोनी का तर्क — “सिगरेट छोड़ दी, तो मैं कम मिलनसार हो जाऊंगी”

ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति कैस सईद जैसे कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ मेलोनी का रिश्ता इसी “स्मोकिंग बॉन्डिंग” के ज़रिए मजबूत हुआ। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “अगर मैंने धूम्रपान पूरी तरह छोड़ दिया, तो शायद मैं कम सोशल हो जाऊंगी — और वो मेरे लिए नुकसानदायक होगा।”

‘स्ट्रेस बस्टर’ या ‘क्रेविंग’?

मेलोनी मानती हैं कि स्मोकिंग छोड़ना आसान नहीं। लगातार चल रही वैश्विक राजनीति — यूक्रेन युद्ध, प्रवासन संकट और यूरोपीय संघ की चुनौतियों के बीच सिगरेट उनके लिए तनाव से राहत का एक जरिया बन चुकी है।
हाल ही में एक वाइन इवेंट में उन्होंने शराब पर भी राय दी थी — “मैं कभी खाली पेट नहीं पीती।” लेकिन सिगरेट? वो तो उनके लिए अब आदत से बढ़कर एक साथी जैसी हो गई है।
वैसे, आंकड़े बताते हैं कि इटली की लगभग 20% आबादी (यानी एक करोड़ से ज़्यादा लोग) अब भी स्मोक करते हैं — तो मेलोनी इस मामले में बिल्कुल अकेली नहीं।

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