“मगर ये देश रहना चाहिए” — जब कविता ने राजनीति को राष्ट्रधर्म सिखाया
सरकारें बदलती रहती हैं,सत्ताएँ आती–जाती हैं,राजनीति के रंग हर दौर में बदलते हैं—लेकिन जो अडिग रहना चाहिए,वह है देश। ये शब्द किसी मंचीय कविता की पंक्तियाँ नहीं थे।ये उस सोच की घोषणा थेजिसमें सत्ता से ऊपर संविधानऔर राजनीति से ऊपर राष्ट्र रखा गया।अटल बिहारी वाजपेयी के लिएकविता भावनाओं की सजावट नहीं,बल्कि संकट की घड़ी में … Read more