7 स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव सेवा शुरू न होने पर एमओआईसी व सीएचओ का वेतन रोका
नियमित निगरानी के लिए निरीक्षण टीमों का हुआ गठन
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री आदित्य रंजन की अध्यक्षता में आज जिला विकास शाखा के कर्मचारियों एवं डीएमएफटी पीएमयू की टीम के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें डीएमएफटी, सीएसआर तथा अनटाइड फंड के तहत जिले में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने धीमी गति से चल रही योजनाओं पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी योजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करें और निर्माण कार्य की गुणवत्ता के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करें। योजनाओं की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपायुक्त द्वारा विशेष टीमों का गठन किया गया। ये टीमें सीधे कार्यस्थल पर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगी तथा प्रगति और गुणवत्ता की जांच कर रिपोर्ट सौंपेंगी।
वहीं स्वास्थ्य प्रक्षेत्र की समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि एन.क्यू.ए.एस. प्रमाणित नेपनिया, बागसुमा, खरकाबाद, मुराडीह, रूपन, रामपुर तथा खरमो आयुष्मान आरोग्य मंदिर से कोई डिलीवरी रिपोर्ट नहीं की गई है और अब तक प्रसव सेवा शुरू नहीं की गई है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए उपायुक्त ने संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सा पदाधिकारी एवं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के वेतन भुगतान पर अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक संबंधित स्वास्थ्य केंद्र में न्यूनतम पांच सफल प्रसव सुनिश्चित किए जाने के बाद ही वेतन निकासी पर विचार किया जाएगा। सभी अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर अविलंब प्रसव सेवाएं बहाल करने का अल्टीमेटम दिया गया।
उपायुक्त ने सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों को निर्देशित किया कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और तत्परता से करें, ताकि जिले के विकास कार्यों एवं जनस्वास्थ्य सेवाओं में ठोस व अपेक्षित सुधार दिखाई दे।
बैठक में निदेशक डीआरडीबी श्री राजीव रंजन, जिला विकास शाखा के सभी संबंधित कर्मचारी तथा डीएमएफटी पीएमयू टीम के सदस्य उपस्थित थे।