झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सह भाजपा नेता चम्पाई सोरेन दुमका जाने के क्रम में धनबाद में रुके।सर्किट हाउस में भाजपा कार्यकर्ताओं ने पहुँच स्वागत किया।वही हेमंत सरकार पर आदिवासी विरोधी, मूलवासी विरोधी होने का गम्भीर आरोप लगाया। साहिबगंज के भोगनाडीह में 171वें हूल दिवस समारोह से पहले सिद्धू-कानू के वंशज को नोटिस जारी किए जाने का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है।
चंपाई सोरेन ने कहा कि हुल दिवस जो कि अंग्रेजो के खिलाफ विरोध का शुरुआत था।भोगनाडीह में हुल दिवस पर सरकार के कदम को आदिवासी समाज के सम्मान पर चोट बताया और कहा कि हूल क्रांति के नायकों के वंशजों को नोटिस देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार पर आदिवासी अस्मिता और इतिहास के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। चंपाई सोरेन ने कहा कि हूल दिवस पूरे आदिवासी समाज के गौरव और बलिदान का प्रतीक है। ऐसे समय में सिद्धू-कानू के वंशजों को नोटिस जारी करना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार इतने बड़े इतिहास को मिटाना चाहती है।जिस सरकार से आदिवासी समाज को सबसे अधिक उम्मीदें थीं, वही सरकार आज उनके सम्मान और अधिकारों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब भी देगी।
पेसा क़ानून पर भी चंपाई सोरेन ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पेसा क़ानून आदिवासियों के हित में नहीं है।इस सरकार ने इसके मूल स्वरूप को ही बदल दिया है। सबसे बड़ा बदलाव तो यह है कि इसके गठन से रूढ़िजन्य विधि एवं धार्मिक प्रथा जैसे शब्द गायब हैं। कहा कि अगर ग्रामसभा के गठन में रूढ़िजन्य व्यवस्था को दरकिनार कर देंगे तो फिर वैसे पेसा का क्या मतलब है। यह पेसा की मूल भावना का खुला उल्लंघन है।वहीं चंपाई सोरेन ने कहा कि दुमका में नवनिर्मित फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नाम में मुर्मू शब्द भी जोड़ा जाना चाहिए।
चंपाई सोरेन ने यहां तक कहा है कि यह अबुआ सरकार ना तो आदिवासी मुलवासी के हित में हैं ना गरीब किसान और विद्यार्थी के ही हित में है।आनेवाले समय में इस सरकार को जनता सबक सिखाएगी।