धनबाद में तेज हुईं मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट की मांग

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चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ आए दिन बढ़ रही हिंसक घटनाओं ने पूरे चिकित्सा समुदाय को गहरे भय और असुरक्षा के माहौल में धकेल दिया है। मरीज के परिजनों के हिंसक बर्ताव से डॉक्टरों में भारी आक्रोश व्याप्त है। एशियन जालान अस्पताल के चिकित्सकों ने
बताया कि ऐसे माहौल में काम करना अब उनके लिए बेहद कठिन और खतरनाक होता जा रहा है। मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ. एएम राय का कहना है कि डॉक्टर दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं, लेकिन किसी मरीज की स्थिति गंभीर होने या उपचार के दौरान अनहोनी होने पर कई बार परिजन अपना आपा खो बैठते हैं और सीधे डॉक्टरों को निशाना बनाते हैं। जालान अस्पताल के सीनियऱ कंस्लटेंट क्रिटिकल केयर डॉ. दिनेश प्रसाद का कहना है कि जब तक डॉक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती रहेंगी. अस्पतालों में हिंसा की घटनाएं न केवल डॉक्टरों का मनोबल तोड़ती हैं बल्कि मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था को भी बाधित करती हैं। वहीं सीनियऱ कंस्लटेंट मेडिसिन डॉ. इंदर प्रसाद ने कहा कि डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार को मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को सख्ती से लागू करने की जरूरत है. कई राज्यों में यह एक्ट लागू भी हो चूका है जबकि झारखण्ड में
डॉक्टरों के कई बार के आंदोलन के बाद ही सरकार इसे लागू नहीं कर रही है.

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