ग्रामीण एकता मंच ने चुनाव आयोग से सुधार की मांग
धनबाद। ग्रामीण एकता मंच के केंद्रीय अध्यक्ष रंजीत सिंह उर्फ बबलू सिंह ने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर चुनाव प्रणाली में व्यापक और कठोर सुधार की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय चुनाव कराना आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन हाल के वर्षों में चुनावी प्रक्रिया में दबाव, धनबल और हेरफेर के आरोपों ने लोकतंत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित किया है। अपने पत्र में उन्होंने विशेष रूप से निर्विरोध चुनाव की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारों को बिना मतदान कराए ही निर्विरोध विजयी घोषित कर दिया जाता है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव में ‘नोटा’ (NOTA) भी एक वैध विकल्प है, ऐसे में मतदाताओं को मतदान का अवसर दिए बिना किसी प्रत्याशी को विजयी घोषित करना उचित नहीं ठहराया जा सकता।
श्री सिंह ने 2024 के लोकसभा चुनाव में गुजरात के सूरत सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भाजपा उम्मीदवार मुकेश दलाल को निर्विरोध सांसद घोषित किया गया, जबकि मतदाताओं के पास NOTA का विकल्प मौजूद था। उनका तर्क है कि यदि मतदान कराया जाता, तो संभव है कि जनता NOTA को अधिक मत देती और परिणाम भिन्न हो सकता था। ऐसे में मतदान का अवसर नहीं दिया जाना मतदाताओं के अधिकारों को सीमित करता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में केवल एक ही उम्मीदवार शेष रह जाता है, तब भी NOTA को विकल्प मानते हुए मतदान अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि जनता की वास्तविक राय सामने आ सके और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहे। पत्र में चुनाव आयोग से मांग की गई है कि इस तरह की विसंगतियों को दूर करने के लिए आवश्यक नीतिगत बदलाव किए जाएं और भविष्य में किसी भी परिस्थिति में NOTA की अनदेखी न हो। साथ ही इस विषय पर की जाने वाली कार्रवाई से संगठन को अवगत कराने का भी अनुरोध किया गया है।