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आईआईटी आईएसएम में नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी का प्रेरक संबोधन

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कम्पैशन क्वोशेंट पर दिया जोर
शताब्दी व्याख्यान श्रृंखला की भव्य शुरुआत

धनबाद, 21 मार्च : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (इंडियन स्कूल ऑफ माइंस), धनबाद में शनिवार को शताब्दी वर्ष के अंतर्गत एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक आयोजन हुआ, जब संस्थान ने अभिनाश चंद्र एवं बिनापानी सिन्हा मेमोरियल लेक्चर सीरीज़ के तहत पहला शताब्दी व्याख्यान सफलतापूर्वक आयोजित किया। इस अवसर पर नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात समाजसेवी कैलाश सत्यार्थी ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधन दिया। यह आईआईटी (आईएसएम) परिसर में किसी नोबेल पुरस्कार विजेता का पहला आगमन भी रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने की, जबकि कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन की डीन प्रो. रजनी सिंह ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पूरे कार्यक्रम का संचालन भी किया।

यह व्याख्यान श्रृंखला संस्थान के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र श्री मिहिर सिन्हा (1966 बैच, पेट्रोलियम इंजीनियरिंग) द्वारा अपने माता-पिता की स्मृति में दिए गए उदार योगदान से शुरू की गई है। इसका उद्देश्य विज्ञान, तकनीक और मानविकी के बीच संवाद को बढ़ावा देना है, ताकि शिक्षा और समाज के बीच बेहतर संतुलन स्थापित हो सके।

अपने विचारों में कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि करुणा केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि एक सक्रिय शक्ति है, जो समाज को बदल सकती है।उन्होंने ‘कम्पैशन क्वोशेंट की अवधारणा रखते हुए कहा कि हर व्यक्ति को दूसरों के दुख को अपना समझकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि आज के समय में बढ़ती उदासीनता समाज के लिए खतरा है और इसे करुणा के जरिए ही दूर किया जा सकता है।

उन्होंने तकनीक के क्षेत्र में भी करुणा के महत्व पर जोर देते हुए कम्पैशनेट एआई की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार यदि तकनीक में मानवीय मूल्यों का समावेश नहीं होगा, तो विकास अधूरा रह जाएगा। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे ज्ञान के साथ संवेदनशीलता को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं।

निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में इस आयोजन को संस्थान के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि वास्तविक शांति तभी संभव है जब विज्ञान और तकनीक का उपयोग समाज की भलाई के लिए किया जाए। उन्होंने इस व्याख्यान श्रृंखला की शुरुआत के लिए श्री मिहिर सिन्हा के योगदान की सराहना की और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

प्रो. रजनी सिंह द्वारा पढ़े गए संदेश में मिहिर सिन्हा ने अपनी अनुपस्थिति पर खेद जताया, जो एक दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती होने के कारण रही। उन्होंने इस व्याख्यान श्रृंखला को अपने माता-पिता के मानवीय मूल्यों को समर्पित बताया और कहा कि समाज को अधिक संवेदनशील और न्यायपूर्ण बनाने में मानविकी की महत्वपूर्ण भूमिका है।

कार्यक्रम में संस्थान के बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्र, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। पेनमैन ऑडिटोरियम में उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला और प्रतिभागियों ने पूरे मनोयोग से व्याख्यान को सुना।

यह आयोजन आईआईटी आईएसएम धनबाद के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ, जिसने ज्ञान, तकनीक और मानवीय मूल्यों के समन्वय का एक सशक्त संदेश दिया।

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