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कालीमेला में स्वच्छता की मिसाल: सुमित बाउरी की ‘युवा सेना’ ने किया ऐतिहासिक सफाई अभियान

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बदलाव की गूंज: सुमित बाउरी की ‘युवा सेना’ ने एक ही दिन में चमकाया कालीमेला का बिनोद पुल
धनबाद, जोरापोखर: कहते हैं कि अगर इरादे नेक हों और नेतृत्व मजबूत, तो पहाड़ भी हिलाया जा सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है जोरापोखर नंबर 1 के निवासी सुमित बाउरी ने। धनबाद के कालीमेला स्थित बिनोद पुल और उसके पास बहती नदी, जो कभी पिकनिक मनाने वालों की गंदगी का ढेर बन चुकी थी, आज सुमित और उनकी टीम की मेहनत से फिर से सांस ले रही है।
पिकनिक का जश्न और नदी का दर्द
कालीमेला का यह इलाका पिकनिक के लिए मशहूर है, लेकिन जश्न खत्म होने के बाद यहाँ केवल प्लास्टिक की प्लेटें, शराब की बोतलें और सड़ा-गला खाना बचता था। नदी का पानी इतना दूषित हो गया था कि स्थानीय महिलाओं के लिए इसे छूना भी दूभर था।
सुमित बाउरी ने जब वहां की महिलाओं की तकलीफों को देखा और सुना, तो उनका दिल पसीज गया। सुमित ने देखा कि कैसे महिलाएं गंदे पानी के बीच काम करने को मजबूर हैं। शुरू में जब सुमित ने स्थानीय लोगों से मदद मांगी, तो किसी ने हाथ नहीं बढ़ाया। लोग उदासीन रहे, लेकिन सुमित ने हार नहीं मानी।
शून्य से सृजन: एक टीम का निर्माण
अकेले शुरुआत करने वाले सुमित ने अपनी आवाज बुलंद की और जोरापोखर नंबर 1 के जागरूक युवाओं को एकजुट करना शुरू किया। उन्होंने लोगों को समझाया कियह नदी हमारी धरोहर है, अगर हम आज चुप रहे तो कल हमारी आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी।धीरे-धीरे सुमित की बातों का असर हुआ और एक समर्पित ‘स्वच्छता टीम’ तैयार हो गई।
ऐतिहासिक ‘वन डे’ क्लीनअप: एक दिन में बदली सूरत
सुमित बाउरी के नेतृत्व में इस टीम ने एक बड़ा संकल्प लिया पूरे क्षेत्र को एक ही दिन में पूरी तरह साफ करने का। सुमित और उनकी टीम ने सुबह होते ही बिनोद पुल और नदी के किनारों पर धावा बोल दिया।नदी के कीचड़ में फंसी प्लास्टिक की थैलियों और कांच की बोतलों को नंगे हाथों और औजारों की मदद से निकाला गया।महिलाओं का मिला आशीष: सुमित की मेहनत देख, जो महिलाएं पहले संकोच कर रही थीं, वे भी आगे आईं और टीम का उत्साह बढ़ाया। पूर्ण स्वच्छता: सूर्यास्त होने तक, जहाँ कचरे का अंबार था, वहाँ अब साफ मिट्टी और बहता पानी दिख रहा था। पूरी जगह को 100% कचरा मुक्त कर दिया गया।सुमित बाउरी का संदेश जोरापोखर नंबर 1 के इस युवा नायक ने साबित कर दिया कि बदलाव के लिए सत्ता या बड़े फंड की नहीं, बल्कि सही नीयत की जरूरत होती है। सुमित ने पिकनिक मनाने आने वालों से हाथ जोड़कर अपील की है
खुशियाँ मनाएं, लेकिन अपनी गंदगी पीछे न छोड़ें। नदी को मंदिर समझें, कूड़ेदान नहीं।सुमित बाउरी और उनकी टीम का यह कार्य पूरे धनबाद के लिए एक मिसाल है। बिनोद पुल की सफाई केवल एक दिन का काम नहीं, बल्कि एक नई सोच की शुरुआत है। प्रशासन को भी चाहिए कि वह सुमित जैसे युवाओं को प्रोत्साहित करे और कालीमेला क्षेत्र में डस्टबिन और सख्त नियम लागू करे

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