धनबाद, 14 जनवरी 2025: मकर संक्रांति के अवसर पर धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय ने सदियों पुरानी परंपरा, सेंदरा पर्व, का उल्लासपूर्वक पालन किया। तेली पाड़ा के आदिवासी समुदाय के लोग सुबह स्नान-ध्यान के बाद जंगलों में सामूहिक रूप से शिकार के लिए निकले। सेंदरा का अर्थ होता है शिकार करना, और इस परंपरा को निभाने के लिए जंगल से लाए गए शिकार का गांव में सामूहिक बंटवारा किया जाता है।
बेंझा तुंग की परंपरा-::शिकार के बाद, गांव के मैदान में आदिवासी समुदाय के लोग एकत्र हुए। मैदान में एक खंभा गाड़कर उस पर तीर से निशाना लगाने की परंपरा का पालन किया गया, जिसे बेंझा तुंग कहा जाता है। यह आयोजन सामूहिकता और परंपरा का प्रतीक है।
परंपरा का निर्वहन और चुनौतियां-::आदिवासी समुदाय के वरिष्ठ सदस्य जगत महतो ने बताया कि जंगलों की घटती संख्या के बावजूद समुदाय अपनी इस परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है। सेंदरा पर्व केवल शिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आदिवासी संस्कृति और उनकी एकजुटता का प्रतीक भी है।
मकर संक्रांति के साथ जुड़ी यह अनूठी परंपरा झारखंड के आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत बनाए रखने का प्रमाण है। ग्रामीणों ने इस अवसर पर उत्साहपूर्वक भाग लिया और सामूहिकता का संदेश दिया।