बज़ट में डॉकी का अनोखा नमूना मनाया गया
आकर्षक तरीकों से सजा ओपन पाइपलाइन, रॉयल इन्विटिशन कार्ड, लाइव म्यूजिक, ग्रैंड एंट्री, 40 हजार से ज्यादा का केक और खास पर लगभग 300 लोग….इनमें सबसे बड़े पैमाने पर लगे होंगे कि किसी ग्रैंड फैंटेसी की ही बात हो रही है. सुविधा तो भव्य थी पर यह सुविधा
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5 जनवरी को उनके पेट डॉगी रोज के 6 साल पूरे हो गए। जिसका उन्होंने भव्य तरीके से जन्मदिन मनाया। सिंगल मदर्स सपना के लिए रोज उनकी बेटी की तरह है। उनका कहना है कि मैं जब इसे लेकर आई थी तब ये 1 महीने की थी। आज 6 साल पूरे हो गए हैं। उन्होंने बताया कि यह पहला आंशिक सेलिब्रेशन इतना भव्य नहीं है। रोज का हर साल इसी तरह मनाती हूं।
ऐसी है रोट वेइलर के रोज़ बनने की कहानी
सपना का पालतू कुत्ता रोट वेयलर नस्ल की है। सपना बताती हैं कि मैं इस सोलापुर से लेकर आई हूं। तब यह एक महीने की थी। जानिए साल 2019 में महाराष्ट्र के सोलापुर में क्या हुआ था। वहां पर डॉग का आयोजन किया गया था। उनका साक्षात्कार रोज से हुई। सपना को रोज इतना पसंद आया कि उसे 25 हजार रुपये में खरीद कर ले आई। रोज टैब से उनका साथ है। स्वप्न रोज़ को अपने बच्चे की तरह के गुलाम कहते हैं।
सपना सोना अपने पेट रोज़ के साथ
स्वप्न के अनुसार रोज का स्पेशल केयर होता है। उनके लिए अलग से केयर टेकर राखी हुई हैं। रोज की देख भाल पर हर महीने करीब 30 हजार रुपये का खर्च होता है। इस बात से आपको पता चल सकता है कि घर में उसके लिए आउट डोर के साथ इनडोर में डायमंड कैमरे लगे हुए हैं। अलग से डॉक्टर भी है. सपने के साथ रोज का साथ उठना-बैठना होता है। सपना उसे अपने साथ एमजी हेक्टर में लेकर घूमती हैं।
टाइटेनिक फिल्म की एक्ट्रेस का नाम रखा गया ‘रोज’
यूएसडी डॉगी के नाम की भी अलग कहानी है। सपना का कहना है कि जब मैं इसे लेकर आया तब इसका नाम क्या दिया जाएगा इसे लेकर काफी रिसर्च किया। गूगल से भी नाम के सेशन के लिए कुछ भी नहीं। फिर एक दिन टाइटेनिक मूवी देखते हुए लगा कि इस नाम वाली फिल्म की एक्ट्रेस के नाम पर ही रखूं। फिर उसी दिन से इसे ‘रोज’ के नाम से पुकारा गया। शंका के अनुसार इसके नामकरण के लिए भी अलग से अनुष्ठान किया गया था।

अंतिम सेलिब्रेशन में ऐसी थी रोज़ की ग्रैंड इंट्री
समाज सेवा भी करती है सपना सोना
सोना सोना केस्टेपा की रहने वाली हैं। वह समाज सेवा भी करती है। उन्होंने जुगसलाई स्थित अंत्योदय भवन कॉलोनी के पास करीब 2 लाख करोड़ रुपये खर्च कर 20 सूर्य स्ट्रीट लाइटें लगाई हैं। ऑर्गेनिक सेंटर में मैट कोटिंग किया गया। प्रतिदिन आश्रम और बस्तियों में लगभग 300 लोग भोजन करते हैं। वह गरीबों को खाना खिलाना, गरीबों का बंटवारा, गरीब बेटी की शादी जैसे काम करता रहता है।