महापौर सीट को सामान्य करने के फैसले के खिलाफ दलित संगठनों का जोरदार प्रतिवाद

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झारखंड निकाय चुनाव में धनबाद महापौर सीट को सामान्य (अनारक्षित) किए जाने के फैसले के खिलाफ शुक्रवार को सभी दलित संगठनों के संयुक्त आह्वान पर शहर में जोरदार प्रतिवाद प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन रणधीर वर्मा चौक पर आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में विभिन्न दलित संगठनों के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए।

प्रदर्शन की शुरुआत डीआरएम चौक स्थित संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद सभी संगठन एकजुट होकर पैदल मार्च करते हुए रणधीर वर्मा चौक स्थित धरना स्थल पहुंचे, जहां आरक्षण नीति के खिलाफ सरकार के फैसले पर जमकर विरोध जताया गया।

धरना स्थल पर आयोजित सभा की अध्यक्षता कर रहे शांतनु चंद्रा ने कहा कि सरकार ने निकाय चुनाव में आरक्षण का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर करने का दावा किया है, लेकिन धनबाद में अनुसूचित जाति (SC) की आबादी अधिक होने के बावजूद महापौर की सीट को आरक्षित नहीं किया गया। यह निर्णय न सिर्फ संविधान की भावना के खिलाफ है, बल्कि दलित समाज के अधिकारों का सीधा हनन भी है।

उन्होंने बताया कि इसी मुद्दे को लेकर पूर्व में उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई पूरी हो चुकी है और न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। शांतनु चंद्रा ने उम्मीद जताई कि न्यायालय से दलित समाज के हक में फैसला आएगा।

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। दलित संगठनों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि आरक्षण के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

फिलहाल, इस संयुक्त प्रतिवाद प्रदर्शन के बाद अब सभी की निगाहें सरकार की प्रतिक्रिया और झारखंड हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं। देखना होगा कि इस आंदोलन का सरकार पर क्या असर पड़ता है और धनबाद महापौर सीट के आरक्षण को लेकर आगे क्या निर्णय सामने आता है।

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