बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान लंबे समय से शांत दिखाई देने वाला माहौल गुरुवार को अचानक तनावपूर्ण हो गया। मोकामा में जनसुराज से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व राजद नेता दुलार चंद यादव की हत्या ने प्रदेश में एक बार फिर राजनीतिक हिंसा की चर्चाओं को हवा दे दी। यह आरोप लगाया जा रहा है कि यह वारदात उस समय हुई जब जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह के समर्थकों और जनसुराज कार्यकर्ताओं के बीच झड़प बढ़ते-बढ़ते गोलीबारी में बदल गई। आरोपों के अनुसार गोली लगने से दुलार चंद की मौत हो गई, और उनके परिजनों ने सीधे अनंत सिंह के समर्थकों को जिम्मेदार बताया है।
तेजस्वी यादव द्वारा सरकार पर निशाना
चुनावी दौरे से लौटते समय पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए तेजस्वी यादव ने इस घटना को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू है, फिर भी लोग खुलेआम हथियारों के साथ घूम रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार फिर उसी दौर में लौटता दिख रहा है जिसे जनता ने वर्षों पहले पीछे छोड़ने की उम्मीद की थी।
हालांकि तेजस्वी ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन जनवरी महीने में मोकामा क्षेत्र में हुई गोलीबारी का जिक्र करके उन्होंने परोक्ष रूप से अनंत सिंह पर सवाल उठाए।
तेजस्वी का प्रधानमंत्री पर आरोप — “बिहार में अराजकता दिखती ही नहीं”
तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र में हिंसा की जगह नहीं होती, लेकिन बिहार में सत्ता के संरक्षण में आपराधिक तत्व सक्रिय होकर माहौल खराब कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दरोगा अनिरुद्ध पासवान की हत्या और मोकामा में दुलार चंद यादव की मौत इस बात का प्रमाण है कि कानून-व्यवस्था चरमरा चुकी है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एनडीए उम्मीदवारों द्वारा पत्रकारों को धमकाने और हथियार बरामदगी जैसी घटनाओं का परिणाम आज देखने को मिल रहा है। तेजस्वी ने पीएम पर कटाक्ष करते हुए कहा कि बिहार में महाजंगलराज फैलाने वालों को टिकट देकर प्रधानमंत्री खुद राज्य की स्थिति बिगाड़ रहे हैं और जनता इसका जवाब देगी।
हत्या की वजह बना स्थानीय विवाद
घटना के अनुसार घोसवरी क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच कहासुनी के बाद स्थिति बिगड़ गई। मारपीट और झड़प के दौरान चली गोली दुलार चंद को लगी, जिससे उनकी मौत हो गई। दुलार चंद कभी राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाते थे, लेकिन हाल ही में वे जनसुराज के साथ सक्रिय थे।
उनके समर्थकों का आरोप है कि यह हमला पूरी तरह सुनियोजित था और इसमें अनंत सिंह के निकट सहयोगियों की भूमिका रही। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है, लेकिन घटना ने चुनावी माहौल को भारी रूप से प्रभावित किया है।