“नाटक केवल अदाकारी नहीं, जीवन की कला है : बिजय झा”

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धनबाद में रंगमंच और कला को नई ऊर्जा देने वाले एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। द ब्लैक पर्ल्स, धनबाद एवं रंग संस्कार थिएटर ग्रुप, राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय थिएटर कार्यशाला के समापन समारोह में रंगकर्मियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध रंगकर्मी बिजय झा उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। आयोजकों ने पारंपरिक असमिया गमछा और स्मृति-चिह्न भेंट कर मुख्य अतिथि सहित सभी विशिष्ट अतिथियों का सम्मान किया। पूरे समारोह के दौरान कलाकारों और दर्शकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला।

समारोह को संबोधित करते हुए वरिष्ठ रंगकर्मी बिजय झा ने कहा कि “नाटक केवल अदाकारी नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला है।” उन्होंने कहा कि रंगमंच व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन, संवेदनशीलता और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करता है। उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में थिएटर से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि मंच कलाकार को केवल अभिनय ही नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में बेहतर इंसान बनने की सीख देता है।

उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में भी रंगमंच की प्रासंगिकता बनी हुई है। थिएटर समाज का आईना है, जो लोगों को सोचने, समझने और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करता है। कलाकारों को हमेशा सीखते रहने और अपनी कला को समाज के हित में उपयोग करने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर सात दिवसीय कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कार्यशाला के दौरान कलाकारों को अभिनय, संवाद अदायगी, मंच संचालन, बॉडी लैंग्वेज, आवाज़ के उतार-चढ़ाव, भाव-भंगिमा और चरित्र निर्माण जैसी विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह कार्यशाला उनके लिए बेहद प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक रही।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने भी रंगमंच के महत्व पर अपने विचार रखे और कहा कि धनबाद जैसे शहरों में इस तरह की सांस्कृतिक गतिविधियाँ नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का बेहतरीन अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने आयोजकों के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के निरंतर संचालन की उम्मीद जताई।

समारोह के दौरान कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से भी दर्शकों का मन मोह लिया। नृत्य, अभिनय और मंचीय प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया। पूरे आयोजन के दौरान सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी धनबाद में रंगमंच और कला के विकास के लिए इस तरह के आयोजन लगातार किए जाते रहेंगे, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़कर अपनी प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सके।

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