DESK: खाड़ी देशों में जारी तनाव का असर अब आम लोगों की जेब और रसोई दोनों पर दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात के कारण खाद्य तेल और ड्राई फ्रूट के बाजार में तेजी से कीमतें बढ़ रही हैं। दून में रिफाइंड तेल के दाम प्रति लीटर करीब 20 रुपये तक बढ़ गए हैं, जबकि ईरान से आने वाले पिस्ता की कीमतों में लगभग 1000 रुपये प्रति किलो का उछाल देखा गया है।
भारत में इस्तेमाल होने वाले पाम ऑयल का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात किया जाता है। लेकिन बीते कुछ समय से क्षेत्र में जारी तनाव और संघर्ष के कारण सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। पुराना स्टॉक धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और नई खेप ऊंची कीमतों पर बाजार तक पहुंच रही है, जिसका सीधा असर खुदरा बाजार में देखने को मिल रहा है।
कुछ समय पहले तक जो ब्रांडेड रिफाइंड तेल 150 से 160 रुपये प्रति लीटर में मिल रहा था, वही अब 170 से 180 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है। बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है। साथ ही होटल, रेस्टोरेंट और फूड कारोबार से जुड़े लोगों की लागत भी बढ़ने लगी है।
व्यापारियों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र से सप्लाई प्रभावित होने के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में तेल की कीमतों में और इजाफा हो सकता है।
ड्राई फ्रूट बाजार भी इससे अछूता नहीं है। ईरान से आने वाले पिस्ता की आवक कम होने से इसकी कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। वर्तमान में बाजार में पिस्ता करीब 3400 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
कारोबारियों के मुताबिक, यदि खाड़ी देशों में तनाव लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल तेल और ड्राई फ्रूट तक सीमित नहीं रहेगा। मिठाई, नमकीन, बेकरी और होटल इंडस्ट्री में भी महंगाई का असर और ज्यादा देखने को मिल सकता है।
इधर बढ़ती कीमतों और संभावित जमाखोरी को देखते हुए जिला पूर्ति विभाग भी सतर्क हो गया है। जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने अधिकारियों को कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय तनाव अब सीधे आम आदमी की रसोई तक पहुंच चुका है और लोग आने वाले दिनों में कीमतों की स्थिति को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।