लिंडसे क्लब में धूमधाम से मनी कविगुरु रविंद्र नाथ टैगोर की 165 वीं जयंती

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धनबाद :शनिवार को बंगाली कैलेंडर के वैसाख महीने के 25वें दिन पच्छिसे वैसाख में कविगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर के एक सौ पैंसठवां जन्म उत्सव धुमधाम से लिन्डसे क्लब एवं पुस्तकालय के प्रांगन में मनाया गया।संस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत लिन्डसे क्लब के अध्यक्ष अमलेंदु सिन्हा एवं सचिव सलिल विश्वास द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया एवं कविगुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर के तस्वीर पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। क्लब एवं पुस्तकालय द्वारा संचालित आबोल ताबोल नाम से छोटे छोटे बच्चो का खेल खेल मे बंगला सिखाने का एक प्रयास काफ़ी दिन से चल रही है। इस संस्कृतिक कार्यक्रम के शुरुआत मे आबोल ताबोल के छोटे-छोटे बच्चों ने कविगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर के लिखे हुए नृत्य नाटिका ‘जूता आविष्कार’ मंचस्त किए।
आबोल ताबोल के बच्चो द्वारा नृत्य नाटिका प्रस्तुति के उपरांत लिंन्डसे क्लब एवं पुस्तकालय के सदस्यों एवं सदस्याओं द्वारा कविगुरु द्वारा 1939 मे रचित श्यामा का मंचन किया गया , जो कि एक अत्यंत प्रसिद्ध और भावनात्मक नृत्य नाट्य है यह नृत्य नाटक प्रेम, अपराधबोध और नैतिक द्वन्द के दुखद लेकिन रोमांटिक कहानी है।श्यामा रवींद्र संगीत का एक उत्कृष्ट नमूना है जिसमें बंगाली ओपेरा और बैले का एक अनोखा मिश्रण है श्यामा को कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर का एक महत्वपूर्ण रचना माना जाता है, यह नाटक न केवल प्रेम की गहराई को दिखाता है बल्कि सामाजिक दबाव और मानवीय कमज़ोरियों को भी उजागर करता है।धनबाद जिले के हर क्षेत्रों से आये हुए बंगाली दर्शकों ने इस सुन्दर संस्कृतिक कार्यक्रम का लुप्त उठाया एवं कार्यक्रम की सराहना की।कार्यक्रम के अंत मे क्लब के अध्यक्ष द्वारा अपने वक्तव्य में संस्कृतिक कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी दर्शक, कलाकार व मेम्बरों का आभार व्यक्त किया ।

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