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UGC कानून के खिलाफ स्वर्ण समाज की बैठक, बगावत का बिगुल फूंकने का आह्वान

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बाघमारा (धनबाद):
यूजीसी द्वारा हाल में लागू किए गए नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज में नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव किए जाने के आरोपों को लेकर सवर्ण समाज के लोग एकजुट हो गए हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को बेहराकुदर दुर्गा मंदिर परिसर में दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि अब समय आ गया है जब सवर्ण समाज को संगठित होकर इस कानून के खिलाफ निर्णायक संघर्ष करना होगा। वक्ताओं ने “जब-जब सवर्ण बोला है, सिंहासन डोला है” पंक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि सवर्ण समाज की एकजुटता सत्ता को भी झुकने पर मजबूर कर सकती है। बैठक में स्थानीय स्तर से लेकर राज्य और केंद्र सरकार तक विरोध दर्ज कराने का संकल्प लिया गया।

बैठक में लिए गए अहम फैसले

बैठक के दौरान 1 तारीख को प्रस्तावित बंद को सफल बनाने को लेकर रणनीति तय की गई। साथ ही, विरोध को और व्यापक रूप देने के लिए रविवार को महुदा में तीसरी बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ने की योजना बनाई गई।
वक्ताओं ने यूजीसी के नए नियम को सवर्ण समाज के लिए “काला कानून” बताते हुए केंद्र सरकार, विशेषकर भाजपा, पर तीखा हमला बोला।

राजनीतिक जवाबदेही की मांग

रामबालक सिंह ने सभा में मौजूद लोगों से आह्वान किया कि भाजपा द्वारा इस कानून को लाकर सवर्ण समाज के साथ अन्याय किया गया है। उन्होंने मांग की कि पार्टी से जवाब मांगा जाए और आवश्यकता पड़ने पर त्यागपत्र की मांग भी की जाए। उन्होंने कहा कि अब सवर्ण समाज को चुप नहीं रहना चाहिए और सभी राजनीतिक दलों से स्पष्ट रुख की अपेक्षा करनी चाहिए।

कुछ वक्ताओं ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन केवल प्रतीकात्मक पुतला दहन तक सीमित नहीं रहेगा। उनके अनुसार, जिन नेताओं ने इस कानून पर चुप्पी साधे रखी है—चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से हों—उनके खिलाफ भी विरोध दर्ज कराया जाएगा।

यूजीसी नियमों को लेकर आपत्ति क्यों

मिथुन सिंह ने कहा कि नए यूजीसी नियमों को सवर्ण समाज “रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन” के रूप में देख रहा है। उनका आरोप है कि इन नियमों से सामान्य वर्ग के छात्र और शिक्षक खुद को निशाने पर महसूस कर रहे हैं, जिससे समाज में नई खाई पैदा होने की आशंका है।
उन्होंने बताया कि देश के कई हिस्सों में इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। कहीं इस्तीफे दिए गए हैं तो कहीं बंद और विरोध कार्यक्रमों की तैयारी चल रही है। कुछ रिपोर्टों में इन नियमों पर न्यायिक रोक की चर्चा भी सामने आई है, लेकिन इसके बावजूद विरोध जारी है।

यह बैठक सवर्ण समाज के बढ़ते असंतोष को दर्शाती है। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि समाज अब जाग चुका है और अपने अधिकारों के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ेगा।

बैठक का संचालन बिट्टू सिंह ने किया। मौके पर रामबालक सिंह, निप्पू सिंह, मिथुन सिंह, अजय सिंह, जे.के. झा, सुमन सिन्हा, डॉ. मुकेश कुमार राय, राम पांडेय, संजीत मिश्रा, राजेश मिश्रा, चंदन मिश्रा, मदन मोहन चौधरी, अनुज सिंह, पिंटू महथा, बिकाश सिंह, रंधीर सिंह, कुंवर अभिषेक सिंह, उदय प्रसाद सिंह, त्रिपुरारी पांडेय, निरंजन पांडेय सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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