52,878 करोड़ रुपये में हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव का विरोध, केंद्र सरकार से फैसला वापस लेने की मांग
धनबाद एलआईसी ब्रांच 1 में हेमंत मिश्रा ने विरोध का समर्थन करते हुए कहा सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों के हितों की रक्षा जरूरी
धनबाद: आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लॉइज एसोसिएशन (एआईआईईए) ने विरोध जताते हुए केंद्र सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की है। संगठन ने मुनाफे में चल रहे बैंक की बहुमत हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों और आम ग्राहकों के हित प्रभावित हो सकते हैं। एआईआईईए ने बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों के विरोध का समर्थन करते हुए निजीकरण के दूरगामी प्रभावों पर भी चिंता जताई है।
52,878 करोड़ रुपये में हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव
एआईआईईए के अध्यक्ष धर्मराज महापात्र और महासचिव श्रीकांत मिश्रा ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की संयुक्त रूप से 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को 52,878 करोड़ रुपये में बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
प्रस्तावित बिक्री में केंद्र सरकार की 30.48 प्रतिशत और एलआईसी की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है। संगठन का कहना है कि इस सौदे से बैंक में सार्वजनिक क्षेत्र की हिस्सेदारी और नियंत्रण कम हो जाएगा।
बैंक की बेहतर वित्तीय स्थिति के बावजूद निजीकरण पर सवाल
एआईआईईए के अनुसार, आईडीबीआई बैंक की वित्तीय स्थिति में लगातार सुधार हुआ है और बैंक मुनाफा कमा रहा है। ऐसे में बैंक के निजीकरण की आवश्यकता और इसके पीछे के तर्कों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। संगठन ने सरकार के पूर्व आश्वासनों का हवाला देते हुए फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
विनिवेश लक्ष्य पूरा करने के लिए बिक्री का आरोप
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चालू वित्त वर्ष के 80 हजार करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के उद्देश्य से बैंक की हिस्सेदारी बेच रही है। संगठन ने सवाल उठाया कि एक महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थान का नियंत्रण विदेशी वित्तीय कंपनी को सौंपने का निर्णय आर्थिक आत्मनिर्भरता और राष्ट्रहित से जुड़ी नीतियों के अनुरूप कैसे है।
एलआईसी और आईडीबीआई बैंक की साझेदारी का दिया हवाला
एआईआईईए का कहना है कि एलआईसी और आईडीबीआई बैंक के बीच मौजूदा साझेदारी को और मजबूत कर बैंकिंग तथा बीमा सेवाओं के विस्तार के नए अवसर पैदा किए जा सकते थे। संगठन ने आशंका जताई कि सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों के निजीकरण का असर कर्मचारियों के रोजगार संबंधी हितों, ग्राहकों की सुविधाओं और व्यापक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
हेमंत मिश्रा ने भी की फैसला वापस लेने की मांग
बीमा कर्मचारी हजारीबाग मंडल के अध्यक्ष हेमंत मिश्रा ने भी आईडीबीआई बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों के विरोध का समर्थन किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए।