खदानों से संवेदना के स्वर के 21वें वर्ष के उपलक्ष्य में विधायक राज सिन्हा के आवास में हुआ कार्यक्रम

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बीसीसीएल पर पहली साहित्यिक पुस्तक की लेखिका प्रीति पूजा और सह लेखक अनिल पांडे हैं

धनबाद :प्रीति पूजा द्वारा 2006 में लिखित, बीसीसीएल पर पहली साहित्यिक पुस्तक खदानों से संवेदना के स्वर के प्रकाशन के 21वें वर्ष के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम धनबाद के विधायक राज सिन्हा के आवासीय कार्यालय में आयोजित हुआ। प्रीति पूजा के पिता, पुस्तक के सह-लेखक अनिल पाण्डेय ने पुस्तक की प्रति विधायक राज सिन्हा को भेंट की।इस पुस्तक का विमोचन 1 म‌ई
2006 को हुआ था।विधायक राज सिन्हा ने कहा कि यह पुस्तक प्रकाशन के 21 वर्ष बाद भी उतनी ही प्रासंगिक है। पुस्तक से स्पष्ट होता है कि 2006 में बीसीसीएल के बीआईएफआर से बाहर निकलने का एक प्रमुख कारण कंपनी प्रबंधन और जिला प्रशासन की श्रमिकों एवं नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता थी। आज जगह-जगह हो रहे भू-धंसाव और विस्थापन के सवाल पर कोयला कंपनी प्रबंधन और जिला प्रशासन दोनों ही संवेदनहीन हो गए हैं।सह-लेखक अनिल पाण्डेय ने कहा कि आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा अवैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा खनन, तथा कंपनी प्रबंधन एवं जिला प्रशासन द्वारा कई मामलों में अनावश्यक विस्थापन और विस्थापितों को बेलगढ़िया में अमानवीय परिस्थितियों में रहने के लिए विवश करना — यह सब संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।अनिल पाण्डेय ने घोषणा की कि उनकी अगली पुस्तक का विषय होगा-भाकोकोलि: 2006 में संवेदनशील प्रबंधन का 2026 में संवेदनहीन होने की दास्तान। लाभ के लिए संवेदना की हत्या हो रही है।

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