बुद्ध पूर्णिमा 2026: शांति, ज्ञान और करुणा का पावन पर्व

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वैशाख पूर्णिमा का महत्व

वैशाख महीने की पूर्णिमा को अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ, उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और इसी तिथि को उन्होंने महापरिनिर्वाण भी प्राप्त किया। वर्ष 2026 में यह पर्व 1 मई को मनाया जा रहा है।


तिथि और शुभ समय

पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल की रात 9:13 बजे से शुरू होकर 1 मई की रात 10:53 बजे तक रहेगी। इस बार यह पर्व रवि योग में पड़ रहा है, जिसे पूजा-पाठ, दान और शुभ कार्यों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।


धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

बुद्ध पूर्णिमा शांति, ज्ञान और मोक्ष का संदेश देती है। इस दिन लोग सत्य, अहिंसा और करुणा के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने भी इसी दिन बुद्ध के रूप में अवतार लिया था। साथ ही, सत्यनारायण कथा, चंद्रमा को अर्घ्य देना और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।


पूजा करने की विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और यदि संभव हो तो गंगाजल का उपयोग करें। इसके बाद घर या मंदिर में भगवान बुद्ध और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। दीपक जलाएं, मंत्रों का जाप करें और सत्यनारायण व्रत एवं कथा का आयोजन करें। रात के समय चंद्रमा को अर्घ्य देना भी शुभ माना जाता है।


इस दिन किए जाने वाले उपाय

बुद्ध पूर्णिमा पर भगवद गीता और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना लाभकारी माना जाता है। भगवान विष्णु का दूध और जल से अभिषेक करें। साथ ही, जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और दान देना पुण्यदायी होता है। यदि संभव हो, तो बोधगया या अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा करना भी शुभ माना जाता है।

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