H-1B वीजा लॉटरी खत्म, अब मिलेगी सिर्फ कौशल और ऊंची सैलरी पर ही अवसर

Share This News

H-1B वीजा लॉटरी खत्म, अमेरिका जाने का रास्ता अब कौशल और सैलरी से तय

नई दिल्ली (NEW DELHI): अमेरिका में काम करने का सपना देखने वाले लाखों भारतीय IT और तकनीकी पेशेवरों के लिए बड़ी खबर है। अमेरिका ने H-1B वीजा की रैंडम लॉटरी प्रणाली को समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब वीजा पाने में किस्मत की बजाय कौशल, अनुभव और वेतन महत्वपूर्ण होगा।

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के अनुसार, नई प्रणाली के तहत उच्च कौशल और ऊँचे वेतन वाले विदेशी पेशेवरों को प्राथमिकता दी जाएगी। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने बताया कि यह नया नियम 27 फरवरी 2026 से लागू होगा और वित्त वर्ष 2027 के H-1B पंजीकरण में पहली बार इसे लागू किया जाएगा।

लॉटरी से वेटेड सिस्टम

पहले H-1B वीजा का चयन पूरी तरह रैंडम लॉटरी पर आधारित होता था। इसका मतलब था कि समान योग्यता वाले कई आवेदकों में किसे वीजा मिलेगा, यह केवल भाग्य पर निर्भर करता था। अब ‘वेटेड सिस्टम’ लागू होगा, जिसमें उच्च कौशल और उच्च वेतन वाले प्रोफाइल को वीजा मिलने की संभावना अधिक होगी। प्रशासन का तर्क है कि पुरानी व्यवस्था का कई कंपनियों द्वारा दुरुपयोग हो रहा था और विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर रखा जा रहा था, जिससे अमेरिकी श्रमिकों को नुकसान हो रहा था।

भारतीय IT पेशेवरों पर असर

भारत के IT, सॉफ्टवेयर, डेटा साइंस और इंजीनियरिंग क्षेत्र के पेशेवर H-1B वीजा धारकों में सबसे बड़ी संख्या हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नए नियमों के बाद कम सैलरी और शुरुआती स्तर की नौकरियों वाले प्रोफेशनल्स को वीजा पाने में अधिक चुनौती का सामना करना पड़ेगा। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाओं (USCIS) का कहना है कि नई प्रणाली से वीजा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय होगी।

पहले से कड़े नियम

H-1B वीजा नियम पहले से ही सख्त हैं। नए आवेदनों पर 1 लाख डॉलर तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा और H-1B एवं H-4 वीजा के लिए कड़ी जांच होगी, जिसमें सोशल मीडिया प्रोफाइल की भी पड़ताल शामिल है। अमेरिका हर साल 65,000 H-1B वीजा और 20,000 अतिरिक्त वीजा (अमेरिकी यूनिवर्सिटी से उच्च डिग्री धारकों के लिए) जारी करता है। लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद H-1B वीजा पाना पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण और प्रतिस्पर्धी होगा।

संक्षेप में, अब अमेरिका जाने का रास्ता किस्मत से नहीं, बल्कि कौशल, अनुभव और मोटी सैलरी पर निर्भर करेगा। भारतीय युवाओं के लिए यह संकेत है कि उन्हें ‘हाई-वैल्यू प्रोफेशनल’ बनना ही होगा।

Leave a comment