विकारों से मुक्त निर्मल मन में ही प्रभु का वास :कथावाचक
धनबाद। लग गया भव से पार, लेकर नाम तेरा… श्रीमन नारायण, नारायण, नारायण… और संतों के संग तेरे लाडले, तेरी अच्छी बनेगी… जैसे वृज के भजनों पर श्रद्धालु भक्ति के सागर में गोते लगाते नजर आए। पुराना बाजार स्थित शंभुराम धर्मशाला में गोयल परिवार की ओर से आयोजित सामूहिक श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के चौथे दिन भक्तिमय वातावरण में कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।
कथा के दौरान कथावाचक ने कहा कि मनुष्य की आंखों पर विकारों का ऐसा सूरमा लगा है कि वह इन चक्षुओं से प्रभु के वास्तविक स्वरूप का दर्शन नहीं कर सकता। प्रभु की प्राप्ति के लिए मन को निर्मल करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धर्म का न आदि है और न अंत। जीवन में सत्य और समर्पण हो, तभी प्रभु के दर्शन संभव हैं।
कथावाचक ने देवताओं और दैत्यों के बीच हुए समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाते हुए भगवान के कच्छप और मोहिनी अवतार की कथा का वर्णन किया। इसके बाद प्रह्लाद के कुल और राजा बलि की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि राजा बलि अत्यंत दानी और धर्मपरायण थे। अष्टम स्कंध की कथा के क्रम में भगवान श्रीहरि द्वारा वामन रूप धारण कर राजा बलि की परीक्षा लेने का प्रसंग सुनाया गया।
कथावाचक ने बताया कि भगवान वामन राजा बलि के द्वार पहुंचे और उनसे तीन पग भूमि दान में मांगी। राजा बलि के वचन देते ही भगवान ने विराट स्वरूप धारण कर दो पग में ही आकाश और पाताल को नाप लिया। तीसरे पग के लिए स्थान नहीं बचने पर राजा बलि ने अपना शीश भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया। कथा प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान कथा स्थल पर उत्साह और उल्लास का माहौल रहा। भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए।
आयोजन को सफल बनाने में ओम प्रकाश गोयल, संतोष गोयल, सुशील गोयल, अंबिका गोयल, प्रमोद गोयल, विनोद गोयल, आकर्षण गोयल, मीनू गोयल, मंजू गोयल, रिंकी गोयल, वंदना गोयल, नीरू गोयल, कुसुम, पूनम गोयल, रीशु गोयल, रामअवतार गोयल, रमेश गोयल, रिमझिम, शुभम, दीपक, संस्कार, आशीष, तेजस्व गोयल समेत गोयल परिवार के दर्जनों युवा, महिला और पुरुष सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। कथा का आयोजन प्रतिदिन अपराह्न 3 बजे से संध्या 6 बजे तक किया जा रहा है और यह 21 सितंबर तक चलेगा।