धनबाद, 5 फरवरी 2025: फाइलेरिया उन्मूलन के लिए जन आंदोलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) के राज्य समन्वयक डॉ. अभिषेक पॉल ने कहा कि इस बीमारी से बचने का एकमात्र उपाय मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) कार्यक्रम के तहत दवा का सेवन करना है। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है और इसका संक्रमण बचपन में हो जाता है। इस बीमारी का पता चलने में 5 से 10 साल का समय लग सकता है।डॉ. पॉल ने यह भी कहा कि फाइलेरिया की दवा लेने से अगर सर दर्द, उल्टी, बुखार जैसे एडवर्स इफेक्ट होते हैं तो यह शुभ संकेत है, क्योंकि इसका मतलब है कि व्यक्ति में फाइलेरिया का संक्रमण था। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया का इलाज करने वाली दवाइयाँ, डीईसी और एल्बेंडाजोल, WHO द्वारा परखी और प्रमाणित हैं।
राज्य की कीटविज्ञानशास्री श्रीमती साग्या सिंह ने कहा कि फाइलेरिया का उन्मूलन जन आंदोलन से ही संभव है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे दवा प्रशासकों को घर में प्रवेश करने दें, क्योंकि हर आयु वर्ग के लिए अलग-अलग डोज निर्धारित है। 5 से 6 साल तक प्रत्येक वर्ष एक बार दवा लेने से पूरा समुदाय फाइलेरिया मुक्त हो सकता है।धनबाद सहित राज्य के 14 जिलों में आगामी 10 फरवरी से 25 फरवरी तक फाइलेरिया उन्मूलन के लिए मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम चलाया जाएगा। इस दौरान सभी आयु वर्ग के लोगों को निर्धारित दवाइयाँ दी जाएंगी।
कार्यशाला में WHO के राज्य समन्वयक डॉ. अभिषेक पॉल, कीटविज्ञानशास्री श्रीमती साग्या सिंह, राज्य आइईसी कंसलटेंट श्रीमती नीलम कुमार, स्टेट ट्रेनिंग कंसलटेंट श्री विनय कुमार, और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अलावा मीडिया प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

