धनबाद अंचल कार्यालय में जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) की प्रक्रिया भ्रष्टाचार का शिकार हो चुकी है। बिना घूस दिए आवेदन स्वीकृत नहीं होते, और न्यूनतम रिश्वत ₹15,000 से शुरू होती है, जिसकी कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
कुसुम न्यूज़ की टीम जब अंचल कार्यालय पहुंची, तो अंचल अधिकारी ने मीडिया से बात करने से इंकार कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, 1 से 10 डिसमिल तक की जमीन के लिए ₹8,000 घूस तय है, जबकि 11 डिसमिल से अधिक होने पर यह राशि ₹30,000 तक पहुंच जाती है। बिचौलियों का पूरा नेटवर्क यहां सक्रिय है, जो एडवांस में पैसे लेकर ही आवेदन को आगे बढ़ाते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल 2024 से 17 जनवरी 2025 तक कुल 6,383 म्यूटेशन आवेदन आए, जिनमें से केवल 1,756 को स्वीकृति मिली, जबकि 2,484 आवेदन अब भी लंबित हैं और 2,484 को सीधे रिजेक्ट कर दिया गया। आवेदकों का आरोप है कि अगर बिचौलियों से सौदा नहीं पटा, तो 90 दिनों बाद फाइल रिजेक्ट कर दी जाती है।
अंचल कार्यालय में कार्यरत कुछ ऑपरेटरों पर भी सेटिंग-गेटिंग का आरोप है। जेएमएम महानगर अध्यक्ष जे.पी. वालिया ने कहा कि धनबाद अंचल कार्यालय भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है। रिश्वत न देने पर या तो आवेदन लंबित रखे जाते हैं या फिर मनमाने बहाने बनाकर रिजेक्ट कर दिए जाते हैं।
अब सवाल यह है कि क्या उपायुक्त और वरीय अधिकारी इस भ्रष्टाचार पर कोई कार्रवाई करेंगे, या फिर आम जनता यूं ही शोषण का शिकार होती रहेगी?