झारखंड के 24 जिलों से 19 जिलों में आवास मुक्त हो गये हैं. स्टालिन से स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
झारखंड के संयुक्त राज्य अमेरिका में शामिल हैं, जहां अब भी सम्मानित कार्यकर्ता हैं। इनमें से पश्चिमी सिंहभूम जिले का मुख्यालय चाईबासा में 12 से अधिक लोगों की सूची है, जो सबसे अधिक प्रभावित हैं। चाईबासा के जंगल में विभिन्न गुप्तचरों की रिपोर्ट के अनुसार
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इन स्टॉकिंग्स की सफाई करते हुए राज्य को अगले एक साल में मित्रता मुक्त बनाने का अधिकार झारखंड पुलिस को मिला है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से यह जिम्मेदारी राज्य पुलिस को सौंपी गई है। डेसेस साल नेशनल सिक्युरिटी काउंसिल की बैठक में प्रभावित राज्यों को दलित मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया था। उसी कड़ी में राज्य सरकार को यह निर्देश मिला है।
कोल्हान बना है जनरल का सेफ जोन
झारखंड में कोल्हान का इलाका माओवादी-नक्सल के लिए सेफ जोन बना है। यहां झारखंड पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र बल के जवान दो साल से अधिक समय से शुरुआत को खत्म करने को लेकर अभियान चला रहे हैं। आए दिन इस क्षेत्र में पुलिस बलों को सफलता मिल रही है फिर भी चाईबासा के जंगल में जमाए माओवादियों के बड़े नेता अभी तक नहीं पहुंच पाए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक चाईबासा के बाबूडेरा इलाके में माओवादी शीर्ष पर 40 से 50 की संख्या में नक्सली बैठे हैं। इनमें पोलित ब्यूरो के सदस्य मिसिर बेसरा, सेंट्रल कमेटी के सदस्य अनल और कोटा मंडल, बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी के सदस्य सुशांत, अजय महतो, अमित हांसादा और एपटन जैसे शीर्ष पदाधिकारी शामिल हैं।
राज्य में कई सक्रिय संगठन हैं
राज्य में केवल माओवादी प्रतिष्ठा ही नहीं है। यहां अलग-अलग जिलों में अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग-अलग वामपंथी संस्थाएं हैं। हालाँकि अधिकतर लोगों का प्रभाव लगभग ख़त्म हो चुका है। राज्य में माओवादियों के अलावा टी.पी.सी., जे.एस.पी.सी., टीएस.पी.सी. जैसे संगठन सक्रिय रह रहे हैं। इनमें से टीपीपीसी, टीएसपीसी और जे.एस.पी.सी. जैसे संगठन माओवादी संगठन से निकले हुए लोगों को ही संगठन बना रहे हैं। ये संगठन गिरिडीह समेत, गुमला, लोहरदगा, छत्रा और अनूठेहार राज्य के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हैं।

राज्य के विशेषाधिकारी का हाल
झारखंड पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरिडीह, गुमला, व्लादिहार, लोहरदगा और पश्चिमी सिंहभूम में ही उन पांच परिधानों की सूची है, जो प्रभावित हैं। हालाँकि इन अनूठे में केवल पश्चिमी सिंहभूम जिला ही अति पिछड़ा प्रभावित है। गिरिडीह, गुमला, लोहरदगा और लासाहार में बंधक बनाए गए हैं। इन डुप्लिकेट को मियामी ऑफ कंसर्न की श्रेणी में रखा गया है। सरायकेला-खरसावां, चतरा, खूंटी, रांची, बोकारो और गढ़वा जैसे जिले हैं, जहां गणतंत्र के खत्म होने की बात पुलिस कह रही है।

आंकड़ों में देखें पुलिस को मिली सफलता
पुलिस मुख्यालय की ओर से मिली रिपोर्ट के अनुसार, एक साल में जांच को खत्म करने या उन्हें नियंत्रित करने में पुलिस को सफलता हाथ लगी है। एक साल में 244 जेनरल को गिरफ़्तार किया गया है। जिसमें एक सैक सदस्य, दो जो कमांडर, 6 सब जोनल कमांडर और 06 एरिया कमांडर रैंक के पद पर हैं।
वहीं 24 जेनरल ने भी समर्पण किया है। जिसमें 04 जोनल कमांडर, 01 सब जोनल कमांडर, 03 एरिया कमांडर और 01 सदस्य है। इसके सात से अधिक बड़े ज्वालामुखी को एन्कर क्वार्टर में मारा गया है।
