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अरिजीत सिंह—पिछले कई वर्षों से भारतीय संगीत की सबसे भरोसेमंद आवाज़। प्यार, विरह, तन्हाई या सुकून—हर जज़्बे को उनकी गायकी ने शब्द दिए हैं। ऐसे में जब यह चर्चा तेज़ हुई कि अरिजीत संगीत से कुछ समय के लिए दूरी बनाने या रफ्तार धीमी करने पर विचार कर रहे हैं, तो यह खबर सिर्फ प्रशंसकों ही नहीं, बल्कि पूरी म्यूज़िक इंडस्ट्री के लिए चौंकाने वाली रही।
सवाल स्वाभाविक है—
जिस कलाकार की आवाज़ की दुनिया दीवानी है, वही कलाकार खुद खामोशी की तरफ क्यों देख रहा है?
चमक-धमक से दूर रहने की फितरत
अरिजीत कभी भी ग्लैमर या शोहरत के पीछे भागने वालों में नहीं रहे। कई मौकों पर उन्होंने यह संकेत दिया है कि मंच से ज़्यादा उन्हें सुकून सादगी में मिलता है।
लगातार कार्यक्रम, प्रचार, अवॉर्ड शोज़ और सफ़र—ये सब उनकी सहज प्रकृति से मेल नहीं खाते। माना जा रहा है कि इस दौर में उनके लिए मानसिक संतुलन, नाम और तारीफ से कहीं ज़्यादा अहम हो गया है।
बदलते दौर का दबाव
आज संगीत सिर्फ सुनने की चीज़ नहीं रह गया है। हिट होने के पैमाने अब ट्रेंड्स, सोशल मीडिया और आंकड़ों से तय होते हैं।
जो कलाकार संगीत को साधना मानते हैं, उनके लिए यह भागदौड़ और “लगातार दिखते रहने” का दबाव थकाने वाला हो सकता है। अरिजीत जैसे गायक के लिए यह माहौल रचनात्मक आज़ादी को सीमित करता दिखता है।
हर जगह मौजूद रहने का आत्ममंथन
एक समय था जब लगभग हर बड़ी फिल्म में अरिजीत की आवाज़ सुनाई देती थी। खुद उन्होंने स्वीकार किया था कि बहुत ज़्यादा गाने से उनकी आवाज़ की पहचान पर असर पड़ने लगा।
संभव है कि अब वह उस मोड़ पर हों, जहाँ संख्या से ज़्यादा गुणवत्ता को अहमियत देने का फैसला ले रहे हों।
निजी ज़िंदगी की अहमियत
माइक के पीछे की दुनिया में अरिजीत बेहद साधारण जीवन जीते हैं। जियागंज में शांत माहौल, परिवार के साथ समय और सामाजिक सरोकार—ये चीज़ें हमेशा उनके दिल के करीब रही हैं।
कयास लगाए जा रहे हैं कि अब उनके लिए निजी जीवन, करियर से ज़्यादा प्राथमिक बन गया है।
क्या यह अंत है या नई शुरुआत?
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अरिजीत सच में हमेशा के लिए गाना छोड़ देंगे?
म्यूज़िक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि यह पूर्ण संन्यास नहीं, बल्कि सीमित और चयनित काम करने की सोच हो सकती है। संभव है कि आगे वह सिर्फ वही गाएं, जिसमें उन्हें सच्चा जुड़ाव महसूस हो।
आख़िरी बात
अरिजीत सिंह सिर्फ एक लोकप्रिय गायक नहीं, बल्कि एक पीढ़ी की भावनाओं की आवाज़ हैं। अगर वह थोड़ी खामोशी चुनते भी हैं, तो शायद इसलिए कि संगीत उनके लिए प्रदर्शन नहीं, आत्मा की जरूरत है।
कभी-कभी सबसे सच्चे सुर वही होते हैं, जो इंसान दुनिया को नहीं, खुद को सुनाने के लिए बचा लेता है।