केन्द्रीय सरना समिति ने आयोजित किया सोहराय- सकरात मिलन सह समापन समारोह

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धनबाद :सोहराय – सकरात मिलन सह समापन समारोह, आदिवासियों का सबसे बड़ा त्योहार सोहराय पर्व है। यह पर्व सात जनवरी से ( गोट पूजा से ) प्रारंभ होकर चौदह जनवरी – 2026 को समाप्त होता है । प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी केन्द्रीय सरना समिति धनबाद की ओर से सोहराय – सकरात मिलन सह समापन समारोह का आयोजन स्थानीय झारखंड मैदान चिरागोड़ा में आयोजित किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी कुम्भनाथ सिंह उपस्थित हुए। जिसमें तिरंदाजी के साथ विभिन्न प्रकार के खेलों और पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्य का कार्यक्रम हुआ। कुम्भनाथ सिंह एवं अन्य अतिथियों के द्वारा सांस्कृतिक नृत्य के कार्यक्रम के बच्चों को एवं तीरंदाजी प्रतियोगिता के प्रथम विजेता अमित मुर्मू,द्वितीय विजेता राज किशोर हांसदा, तृतीय विजेता रवि लाल बास्की व चतुर्थ विजेता दिनु बास्की को पुरस्कृत किया गया। बीरेंद्र हांसदा ने बताया कि इस रोमांचक और पारंपरिक त्योहार का शुभारंभ प्रातः चार बजे शुभ स्नान से होता है। ग्राम/ मुहल्ले के भोदरोंग ( कप्तान ) के नेतृत्व में प्रातः नदी/ तालाब में बच्चे/ बुढ़े , नौजवान महिलाओं को छोड़ कर शुभ स्नान करते हैं । उसके बाद भोदरोंग द्वारा गांव के देवस्थल पर जलार्पण किया जाता है ।फिर गांव के सभी बच्चे,बुढ़े , नौजवान शिकार खेलने जंगल की ओर निकल पड़ते हैं , तब औरतें घर – आंगन की साफ – सफाई करतीं हैं । शिकार से लौटने के बाद शिकार से मिले शिकार को सबमें एक समान बांटा जाता है जिसमें साथ गये कुत्तों को भी शिकार का समान हिस्सा मिलता है ।फिर दिन का खाना खाने के बाद गांव के मैदान में पारंपरिक सोहराय – सकरात मिलन सह समापन समारोह का कार्यक्रम प्रारंभ किया जाता है । जिसमें ( भेजा तुयं ) पारंपरिक तीरंदाजी के साथ विभिन्न प्रकार के खेलों को कार्यक्रम रखा जाता है इस हेतु भोदरोंग के नेतृत्व में कुंवारे लड़के एराडोम ( रेहड़ी ) के पेड़ काट कर लाते हैं और पारंपरिक रुप से भोदरोंग के घर का गुड़ पीठा ( चावल और गुड़ से बनीं पकवान ) को एराडोम के पेड़ की चोटी पर किसी मजबूत डंठल पर पिरोकर गाड़ दिया जाता है ।फिर भोदरोंग के नेतृत्व पर ही मंच पर स्थापित सिद्धू – कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया जाता है । इसके बाद तिरंदाजी के साथ विभिन्न प्रकार के खे।लों का कार्यक्रम प्रारंभ किया जाता है ‌। अंत में सबसे पहले पारंपरिक तिरंदाजी विजेता को भोदरोंग अपने कंधे पर बैठाकर मंच तक लाता है फिर उसे धोती की पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया जाता है और पुरस्कारस्वरूप गंजी गमछी और मुर्गा भेंट किया जाता है । पुरस्कार कार्यक्रम के समापन के बाद पारंपरिक सोहराय नृत्य – गीत कार्यक्रम प्रारंभ किया जाता है ।इस प्रकार हंसी – खुशी के साथ सोहराय – सकरात मिलन सह समापन समारोह कार्यक्रम की समाप्ति की जाती है । कार्यक्रम को सफल बनाने में गांव के मुखिया(मंझी हाड़ाम) सत्यनारायण मुर्मू, भोदरोंग बुधन बास्की , हेम लाल बास्की ,संरक्षक विरेन्द्र हांसदा ,हांगो उरांव, लखीराम मुर्मू ,विकाश मुर्मू ,रवि लाल बास्की ,राजकिशोर हांसदा ,रोशन टुडू ,अमीत मुर्मू अजय सोरेन ,विनय टुडू, राजू हांसदा , अक्षय मुर्मू , राहुल बास्की ,चन्दन बास्की थे।

कुसुम न्यूज़ से कुमार की रिपोर्ट

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