बेलगड़िया में पुनर्वास की हकीकत से रूबरू हो पूर्व बियाडा अध्यक्ष ने अधिकारियों को दी 15 दिन बेलगड़िया में रहने की चुनौती

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​ कतरास/धनबाद : झरिया के अग्नि और भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों से विस्थापित कर बेलगड़िया टाउनशिप में बसाए गए परिवारों की जमीनी हकीकत पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोमवार को पूर्व बियाडा अध्यक्ष विजय कुमार झा ने बेलगड़िया का दौरा कर विस्थापित परिवारों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं को जाना। इस दौरान लोगों ने बिजली, पानी की भारी किल्लत और जर्जर हो चुके मकानों को लेकर अपना दर्द बयान किया।​विस्थापितों ने आरोप लगाया कि जिन्हें बेहतर और सुरक्षित भविष्य का सपना दिखाकर यहां लाया गया था, वे आज बुनियादी जरूरतों के लिए भी तरस रहे हैं। कई मकानों के दरवाजे और अन्य ढांचागत हिस्से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। विजय कुमार झा ने मौके पर ही संबंधित प्रभारी से बात की, जहां बिजली और पानी की बदहाली का मुख्य कारण ट्रांसफार्मर की खराबी को बताया गया। इस पर नाराजगी जताते हुए झा ने कहा कि महज एक जगह से उठाकर दूसरी जगह शिफ्ट कर देना पुनर्वास नहीं कहलाता, जब तक कि वहां सम्मानपूर्वक जीने की सुविधाएं न मिलें।​प्रशासनिक रवैये पर तीखा हमला बोलते हुए विजय कुमार झा ने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों को कम से कम 15 दिन बेलगड़िया में आकर रहना चाहिए। जब वे खुद यहां की नारकीय स्थिति का सामना करेंगे, तभी उन्हें विस्थापितों की असली तकलीफ़ समझ आएगी और बिजली-पानी जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान हो सकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार और संबंधित एजेंसियों की यह जिम्मेदारी है कि वे विस्थापितों को मूलभूत सुविधाएं बिना किसी रुकावट के उपलब्ध कराएं।​दौरे के दौरान वार्ड संख्या-2 के पार्षद मोहम्मद शहाबुद्दीन, समाजसेवी गौतम मंडल और बंटी दत्ता सहित करीब 50 स्थानीय लोग मौजूद रहे। पूर्व बियाडा अध्यक्ष के इस दौरे ने एक बार फिर झरिया पुनर्वास नीति की गुणवत्ता और दावों की पोल खोलकर रख दी है।

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