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भू माफिया रवि यादव और पंकज कुमार की कारस्तानी

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धनबाद के भेलाटांड में 38 ऐसे घर जो हवा में तैरते हैं

धनबाद : जादूगर पीसी सरकार का जादू तो आप सबने देखा होगा जिसमें वह आसानी से आपके ही आंखों के सामने किसी भी चीज़ को गायब कर देते हैं। एक धागा को लोटा में डालकर कबूतर बना देते हैं और हॉल में मौजूद लोग उनकी कलाकारी पर तालियां बजाते रहते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे जादूगरों की टोली यानी ठगबाजों के बारे में बताएंगे जिसने ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसके कारण लोग ताली नहीं अपनी छाती पीट रहे हैं।

कहानी धनबाद के भेलाटांड की है। तस्वीर में जो आप यह तीन मंजिला बिल्डिंग देख रहे है वह AI से बनाया हुआ नहीं है यह असली बिल्डिंग है जिसका नक्शा भी धनबाद नगर निगम से पास हुआ है और जमीन का निबंधन और म्यूटेशन भी झारखंड सरकार ने किया था। अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें जादूगरी कया है तो सुनिये इनकी जादूगरी की कहानी। जिस घर की कहानी हम आपको बता रहे थे उसको सरकारी जमीन के सौदागरों के गिरोह के सरगना राजीव रंजन उर्फ़ रवि यादव और पंकज कुमार ने आम लोगों को झांसे में रखकर बेच दिया। ऐसे सरकारी जमीन के 38 प्लॉट इन दोनों जादूगिरी के ठगबाजों द्वारा गोविन्दपुर के पूर्व अंचलाधिकारी को विटामिन एम देकर म्यूटेशन भी करा दिया गया था। उनके इस गोरखधंधे की जानकारी जैसे ही डीसी आदित्य रंजन को मिली तो उन्होंने जांच करा कर सारे प्लॉट्स के म्यूटेशन को रद्द कर दिया। अब ऐसे 38 लोग जिनका कोई कसूर नहीं था वे सरकारी जमीन पर अपना आशियाना बनाने के बाद भी थाना और कोर्ट कचहरी के चक्कर काट रहे हैं।

पंकज और रवि यादव की इस करतूत को अमलीजामा पहनाने में सिन्हा जी नाम के एक शख़्स की भूमिका भी अहम थी। सिन्हा जी का पूरा नाम बताने से पहले इनका कैरेक्टर आपको जानना जरूरी है। 1992 में एक फिल्म आई थी जिसका नाम था खुदा गवाह। इसके डायरेक्टर थे मुकुल एस आनंद। अब आपको सिन्हा जी का पूरा नाम बता देते हैं। इनका नाम प्रवीण सिन्हा है। भेलाटांड़ में ठगबाज रवि यादव और पंकज कुमार द्वारा जो सरकारी जमीन 58 लोगों को बेचीं गई थी उनके नाम के सारे डीड में प्रवीण सिन्हा बतौर गवाह हस्ताक्षर किये थे क्योंकि सिन्हा जी ही उन 58 लोगों को मोटी कमीशन के चक्कर में लेकर रवि और पंकज के पास गए थे। अब जब डीसी आदित्य रंजन ने फर्जीवाड़े के बाद म्यूटेशन रद्द कर दिया तो सभी भुक्तभोगी सिन्हा जी के घर तक पहुंचे। खूब हंगामा किया। भुक्तभोगियों और पुलिस की दबिश जब सिन्हा जी पर पड़ी तो यहां भी वही गवाह वाला चाल चला गया। अब सिन्हा जी पुलिस केस में सरकारी गवाह बनने वाले है।भेलाटांड़ की इस फिल्म में खुदा गवाह के डायरेक्ट की भूमिका में प्रवीण सिन्हा हैं।

शातिर रवि और पंकज की कागजी करतूत को समझने में इन भुक्तभोगियों को पांच साल लग गए। इन पांच सालों में भेलाटांड़ में सरकारी जमीन पर सोसाइटी बसाने का दावा करने वाले पंकज और रवि यादव ने पहले प्रोजेक्ट का नाम रखा हरि धाम।फिर थोड़े दिन बाद प्रोजेक्ट का नाम हो गया श्री हरि धाम। इन दो नामों से भी काम नहीं हो पाया तो फिर नाम रखा सुखी धाम। ये जो तीन नाम बदले गए ये भी इनकी शातिर चालों का एक हथकंडा था। नाम बदलने की कहानी भी आपको बताते हैं। दरअसल पंकज और रवि आमलोगों को सरकारी जमीन फर्जी कागजात पर बेचकर करोड़ो रुपए कमाते थे पर इनको तो आदत थी ठगी की। प्रोजेक्ट का नाम बदलकर शहर के कई उद्योगपतियों से उनका पैसा दो साल में दुगुना करने के नाम पर उठा लेते थे। इनके गोरखधंधे का पर्दाफाश होने के बाद वैसे लोग भी इनको खोज रहे हैं जिन्होनें करोड़ो की रकम इनके झांसे में आकर लगाया था। रवि और पंकज आज भी उसी कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं कि माल महाराज के और मिर्जा खेले होली।

भेलाटांड़ में जब इन ठगबाजों के खेल का पर्दाफाश हो गया तो इन्होंने एक नई कंपनी बनाई जिसका नाम रखा हब इंडिया। हब इंडिया के नाम से धनबाद के बिरसा मुंडा पार्क के समीप निर्माणा सिटी नाम के एक प्रोजेक्ट का सब्जबाग लोगो को दिखाना शुरू किया है। जिस जमीन को ये दिखाकर आमलोगों को अपने मायाजाल में फंसा रहे हैं वहां भी सरकारी जमीन है। जहां पर इन्होंने अपना मुख्य गेट बनाया है वो सरकारी जमीन पर है। इसको लेकर एक शिकायत के बाद एसडीएम ने 144 भी लगाया है। ये तो मुख्य गेट की बात है अब आपको अंदर की रैयती जमीन की कहानी भी बताते है। यहां भी कई ऐसी जमीन आम लोगों को बेच दिया गया है जिसकी बिक्री कई साल पहले भी हो चुकी है।

पंकज और रवि यादव ने यहां एक बदलाव किया है। अब प्रवीण सिन्हा की जगह मनीष कुमार नाम के एक शख़्स को लॉन्च किया है। मनीष का काम भी सिन्हा जी वाला ही है। वो भी हर दिन लोगों को मुंगरी लाल के हसीन सपने दिखाकर फंसा रहा है। इसके बदले मनीष को एक मोटी रकम दी जाती है। भेलाटांड़ की तरह ही निर्माणा सिटी में भी मोड ऑफ अप्रेंटी सेम है। भेलाटांड़ के कुछ भुक्तभोगियों को चुप रहने और केस नहीं करने की शर्त पर निर्माणा सिटी में जमीन दिया गया है। लेकिन यहां भी सरकारी जमीन और गलत रैयत से जमीन का निबंधन कराया गया है।

आये दिन अखबारों में लोक लुभावन विज्ञापन दिए जा रहे है। शहर के प्रमुख स्थानों पर बड़े बड़े होर्डिंग्स लगाए जा रहे है। हब इंडिया के नाम से शुरु इस प्रोजेक्ट का भी कंपनी एक बार अभी तक बदल चुका है अब हब इंडिया रियलिटी नाम से ठगी के अपने धंधे को रफ्तार देने की कोशिश जारी है। बिना नक्शा पास कराए घर का निर्माण कराया जा रहा है। भेलाटांड़ का खेल समझने में भी आमलोगों को पांच साल लग गए थे। भेलाटांड़ के भुक्तभोगियों ने जिला प्रशासन से निर्माणा सिटी की लिखित शिकायत कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है ताकि और लोग इनकी ठगी या यूं कहें कि इनकी जादूगरी के शिकार नहीं हो पाएं।

आमलोगों से फर्जीवाड़ा की तो कई कहानियां पंकज कुमार और राजीव रंजन उर्फ़ रवि यादव की आप सुन चुके हैं। पंकज और रवि यादव लोगों से ठगी की गई रकम और आय से अधिक सम्पत्ति को खपाने के लिए एक ट्राई एंड टेस्टेड किरदार को अपने साथ जोड़ा है। इनका नाम है सुरेंद्र जिंदल। श्रीमान धनबाद के चनचनी कॉलोनी में रहते हैं।

सुरेंद्र जिंदल ने 250 करोड़ के बालू घोटाला करने से पहले जगनरायण सिंह के साथ पार्टनरशिप में कंपनी बनाई थी। जिंदल का किरदार ही ऐसा है कि वो सभी को धोखा ही देता है। बालू घोटाला में जगनरायण सिंह और सुरेंद्र जिंदल दोनों जेल गए थे। जेल से अभी दोनों जमानत पर हैं। सुरेंद्र जिंदल ने जगनारायण सिंह को भी धोखा दिया और अब एक और फर्जीवाड़े में लग गया है।

जिंदल की ख्याति का अंदाजा आप उसके खिलाफ पुलिस, सीबीआई और ईडी की डायरी में लिखे घोटाले और जेल कथा से लगा सकते है। 250 करोड़ के बालू घोटाला में ईडी ने इनको नवंबर 2023 में गिरफ्तार किया था। उसकी 11 करोड़ की संपत्ति भी जब्त की गई है। 60 बैंक अकाउंट फ्रिज किया गया था। सीबीआई और आयकर की टीम भी जिंदल के ठिकानों पर कई बार दबिश दे चुकी है। बालू घोटाले में जेल जाने के बाद सुरेंद्र ने जमीन के धंधे में अपना कदम रखा। एक कहावत आपने सुनी होगी चोर चोर मौसेरा भाई। यहां भी पर उसने अपना शागिर्द बनाया हब इंडिया रियलिटी के डायेक्टर पंकज कुमार और रवि यादव। हब इंडिया की टीम भी सरकारी जमीन की हेराफेरी और आमलोगों की कमाई को खपाने के लिए एक किरदार की तलाश में थी तो इसी समय सुरेंद्र जिंदल का साथ उनको मिल गया। अब हेराफेरी की गई करोड़ो की रकम को खपाने के लिए जिंदल ने सूरमा प्रॉपर्टीज़ के नाम से एक कंपनी बनाई है। इस कंपनी में जिंदल का बेटा और बहू भी डायरेक्टर हैं। अब इसी कंपनी के नाम पर निर्माणा सिटी में जमीन की खरीद जिंदल द्वारा की जा रही है। बालू घोटाले की जांच कर रही ईडी को जिंदल की नई कंपनी सूरमा प्रॉपर्टीज़ के फर्जीवाड़े की शिकायत मिली है। ईडी की टीम सूरमा प्रॉपर्टीज़ और हब इंडिया रियलिटी की कुंडली खंगालने में लगी है। दोनों कंपनियों के बैंक एकाउंट की जांच चल रही है।

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