उपायुक्त के निर्देश पर एसएनएमएमसीएच के आईसीयू में चल रहा है नवजात का नि:शुल्क व सर्वोत्तम इलाज
देखरेख के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन, एसएए तथा डीसीपीयू कर्मियों की रोस्टरवार प्रतिनियुक्ति
बरवाअड्डा थाना क्षेत्र अंतर्गत हुचुकटांड़ गांव के समीप झाड़ियों में एक लावारिस नवजात बच्ची मिलने के मामले को धनबाद के उपायुक्त श्री आदित्य रंजन ने अत्यंत गंभीरता से लेते हुए त्वरित संज्ञान लिया है। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को नवजात की सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य देखभाल एवं कानूनी प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
मामले की विस्तृत जानकारी:
दिनांक 27 जुलाई 2026 को बरवाअड्डा थाना द्वारा जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी, धनबाद (दूरभाष सं.- 7903353045) एवं बाल कल्याण समिति की सदस्य श्रीमती ममता अरोड़ा तथा संध्या प्रधान को दूरभाष पर सूचना दी गई कि हुचुकटांड़ गांव के पास झाड़ियों में एक नवजात शिशु मिली है।
सूचना मिलते ही बाल कल्याण समिति, धनबाद द्वारा बरवाअड्डा थाना को निर्देश दिया गया कि बच्ची को अविलंब बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करते हुए शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMCH), धनबाद में इलाज हेतु भर्ती कराया जाए।
इलाज एवं देखरेख हेतु सख्त निर्देश:
उपायुक्त के निर्देशानुसार नवजात बच्ची को एसएनएमएमसीएच (SNMCH) के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया है, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उसका गहन एवं सर्वोत्तम इलाज जारी है। उपायुक्त ने निर्देश दिया है कि बच्ची की स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए और उसके इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए।
वहीं, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी, धनबाद द्वारा अस्पताल में नवजात शिशु की निरंतर देखरेख एवं देखभाल हेतु चाइल्ड हेल्पलाइन (Child Helpline), विश विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान (SAA) तथा जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) के कर्मियों को रोस्टर के अनुसार प्रतिनियुक्त किया गया है।
बाल संरक्षण एवं पुलिस कार्रवाई:
उपायुक्त के दिशा-निर्देश पर जिला बाल संरक्षण इकाई एवं स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। पुलिस प्रशासन को बच्ची के जैविक माता-पिता तथा उसे इस गंभीर स्थिति में झाड़ियों में फेंकने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि किसी के पास इस घटना या बच्ची के परिजनों से जुड़ी कोई भी जानकारी हो, तो वे तुरंत स्थानीय पुलिस या जिला बाल संरक्षण कार्यालय को सूचित करें। प्रशासन नवजात के पूर्ण पुनर्वास एवं सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।