धनबाद: जागृत मंदिर चिरागोड़ा में तृतीय बार वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोजित भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन भागवताचार्य उज्जवल शांडिल्य महाराज ने भागवत के कई मार्मिक प्रसंगों का उल्लेख किया। इस पूरे मौके पर मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भरी हुई थी। भजनों के मधुर धुन पर भी श्रद्धालु झूमने को विवश थे। वहीं श्री शांडिल्य ने अपने प्रवचन में कहा कि यदि आप अपने बच्चों को महान बनाना चाहते हो, तो उन्हें केवल महँगे विद्यालय मत भेजो, सत्संग में भी भेजो।केवल मोबाइल मत दो, माला भी दो।केवल धन कमाना मत सिखाओ, भगवान का नाम लेना भी सिखाओ। क्योंकि सत्संग से संस्कार मिलते हैं।संस्कार से श्रद्धा मिलती है।श्रद्धा से भक्ति 9 है।भक्ति से भगवान मिलते हैं।
और जिसको भगवान मिल गए, उसे संसार में और कुछ पाने की आवश्यकता नहीं रहती। याद रखिए भगवान कभी किसी का कुल, जाति, धन या पद नहीं देखते। वे केवल प्रेम, सेवा, समर्पण और भक्ति देखते हैं। जो संतों की सेवा करता है, कथा सुनता है और भगवान का नाम लेता है, उसका जीवन भी दासी-पुत्र नारद की तरह दिव्य बन सकता है।आइए, हम भी संकल्प लें कि जीवन में सत्संग अपनाएँ, संतों का सम्मान करें, भगवान का नाम जपें और भक्ति के मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल बनाएँ।भागवत कहती है कि सत्संग की एक-एक घड़ी मनुष्य का भाग्य बदल देती है। संतों की कृपा से उस बालक का हृदय बदल गया। उसके भीतर संसार की आसक्ति समाप्त हो गई और भगवान श्रीहरि के प्रति प्रेम जाग उठा।इसलिए मैं कहता हूँ अपने बच्चों को धन से पहले सत्संग दीजिए, संपत्ति से पहले संस्कार दीजिए, क्योंकि धन समाप्त हो सकता है, लेकिन भक्ति कभी समाप्त नहीं होती। वहीं दूसरी ओर भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान आचार्य सुबोध पांडेय जी के नेतृत्व में वाराणसी से आए 21 सदस्यीय वैदिक विद्वान ब्राह्मणों की टीम भागवत परायण में लगी थी, जिसमें मुख्य रूप से आचार्य सुनील पांडेय, गुनानंद झा, जितेंद्र पांडे, आचार्य सूरज पांडे, पंकज पांडे, सुमन पांडे, सप नारायण पांडेय, राजन पाण्डेय, नीतीश पांडेय, नीतीश पांडेय, नितिन पांडेय, अखिलेश पांडेय, चंद्रकांत पांडेय, रोहन पांडे, रोहित पांडेय, रोहन पांडे, रवि पांडेय, दीपक पांडेय भागवत महापुराण की पारायण कर रहे थे।मंदिर समिति के उपाध्यक्ष अजय कुमार भट्ट ने बताया कि कथा रोजाना दो दोपहर तीन बजे से शुरू होकर रात्रि के सात बजे तक चलती है, जिसके बाद मंदिर परिसर में भजन कीर्तन का भी आयोजन किया जाता है।