मणिपाल हॉस्पिटल, धाकुरिया ने धनबाद में न्यूरोसर्जरी और न्यूरो केयर में हो रही आधुनिक प्रगति पर डाला प्रकाश

Share This News

धनबाद:उन्नत न्यूरोलॉजिकल और स्पाइन केयर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए, कोलकाता स्थित मणिपाल हॉस्पिटल, धाकुरिया ने शनिवार को धनबाद में एक न्यूरोसर्जरी और न्यूरो केयर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के समय पर निदान, विशेष उपचार और जागरूकता के महत्व को उजागर करना था।

इस कार्यक्रम का नेतृत्व मणिपाल हॉस्पिटल, धाकुरिया के प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. (प्रो.) रबीन्द्र नारायण भट्टाचार्य, कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन तथा डॉ. रयिजीत मित्रा, क्लिनिकल लीड न्यूरोसर्जरी ने किया। कार्यक्रम के दौरान जटिल मस्तिष्क एवं रीड़ संबंधी रोगों, स्ट्रोक प्रबंधन, न्यूरो-ट्रॉमा केयर तथा न्यूरोसर्जरी में हो रही आधुनिक प्रगतियों के बारे में जानकारी दी गई, जो मरीजों के बेहतर उपचार परिणाम और तेजी से रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

पूर्वी भारत में स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर, स्पाइनल डिसऑर्डर और ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी जैमी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे में समय पर जांच, जागरूकता और विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। क्षेत्रीय आंकड़ों के अनुसार, बिहार और झारखंड में स्ट्रोक के मामलों की संख्या प्रति 1,00,000 जनसंख्या पर लगभग 45 से 150 के बीच है, जो इस क्षेत्र में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के बढ़ते बोझ को दर्शाता है। झारखंड में किए गए अध्ययनों के अनुमार, स्ट्रोक के सबसे अधिक मामले 61-80 वर्ष आयु वर्ग में देखे गए हैं, जबकि इसके बाद 41-60 वर्ष आयु वर्ग का स्थान आना है। वहीं, कुल स्ट्रोक मरीजों में लगभग 65%-70% पुरुष मरीज होते हैं।

इस बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती को ध्यान में रखते हुए, मणिपाल हॉस्पिटल, धाकुरिया का न्यूरोसर्जरी विभाग अत्याधुनिक सर्जिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, न्यूरो-मॉनिटरिंग सिस्टम, मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल तकनीकों और व्यापक क्रिटिकल केयर सुबिधाओं से सुसज्जित है। यह विभाग जटिल न्यूरोलॉजिकल मामलों का अधिक सटीकता, सुरक्षा और बेहतर उपचार परिणामों के साथ प्रबंधन करने में सक्षम है।

न्यूरोसर्जरी में हो रही प्रगति पर बात करते हुए डॉ. (प्रो.) रबीन्द्र नारायण भट्टाचार्य ने कहा, “भारत में न्यूरोलॉजिकल बीमारियां तेजी से एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही हैं और जागरूकता ही जीवन बचाने की दिशा में पहला कदम है। आज न्यूरोसर्जरी, प्रिसीजन इमेजिंग और मिनिमनी इनवेसिव प्रक्रियाओं में हो रही प्रगति के कारण हम कई जटिल मस्तिष्क और रीढ़ संबंधी बीमारियों का अधिक सटीकता, कम जोखिम और तेजी से रिकवरी के साथ इलाज कर पा रहे हैं। मणिपाल हॉस्पिटल में हमारा उद्देश्य केवल उन्नत उपचार प्रदान करना ही नहीं, बल्कि लोगों को शुरुआती लक्षण पहचानने और समय पर चिकित्सा महायता लेने के लिए भी जागरूक करना है, ताकि गंभीर जटिलताओं से बच्चा जा सके।”

अपने विचार साझा करते हुए डॉ. रथिजीत मित्रा ने कहा, “स्ट्रोक और न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता बेहद जरूरी होती है, क्योंकि हर मिनट मरीज की रिकवरी और जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दुर्भाग्यवश, जागरूकता की कमी और देरी से निदान के कारण कई मरीज अस्पताल देर में पहुंचते हैं। न्यूरो केयर, आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और मल्टीडिसिप्लिनरी उपचार पद्धतियों में लगातार हो रही प्रगति के कारण अब मरीजों के उपचार परिणामों में काफी सुधार देखने को मिल रहा है। न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बड़ाना समाज में बढ़ने न्यूरो संबंधी रोगों के बोझ को कम करने के लिए बेहद आवश्यक है।”

Leave a comment