लोन डिसबर्समेंट ही माना जाएगा लक्ष्य प्राप्त करने का आधार

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उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री आदित्य रंजन ने आज जिला स्तरीय निगरानी समिति की बठक कर प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) सहित अन्य योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की।

उपायुक्त ने कहा कि पीएमईजीपी का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नए व्यवसाय स्थापित करके स्व-रोजगार के अवसर पैदा करना है। जबकि पीएमएफएमई ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जो असंगठित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करती है।

परंतु समीक्षा के दौरान पाया गया कि कई बैंकों द्वारा इन योजनाओं के आवेदन आवेदक का सिबिल स्कोर अच्छा रहने के बाद भी विभिन्न कारण बताकर अस्वीकृत कर दिए जाते हैं। आवेदकों से पोर्टल में दर्शाए गए दस्तावेजों के अलावा अतिरिक्त दस्तावेज, कॉलेटरल सिक्योरिटी, व्यवसायिक बिजली कनेक्शन व अन्य कागजात की मांग की जाती है।

उपायुक्त ने कहा कि केवल आवेदन की स्वीकृति नहीं बल्कि अब बैंक द्वारा लोन डिसबर्समेंट को लक्ष्य प्राप्त करने का आधार माना जाएगा। उन्होंने खराब प्रदर्शन करने वाले कुछ बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक के साथ विशेष बैठक करने का तथा योजनाओं के लिए प्राप्त आवेदनों को फॉलो अप करने का निर्देश दिया।

बैठक में उपायुक्त श्री आदित्य रंजन, उप विकास आयुक्त श्री सन्नी राज, जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक श्री राजेन्द्र प्रसाद, एलडीएम श्री अमित कुमार, जेएसएलपीएस के डीपीएम श्री सुदिप्तो बनर्जी, रांची से आए खादी विलेज इंडस्ट्रीज कमिशन के जिला समन्वयक श्री श्याम देव चौधरी के अलावा विभिन्न बैंक के प्रतिनिधि मौजूद थे।

कुसुम न्यूज़ से कुमार की रिपोर्ट

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